शामली। लंबित विवेचनाओं को निस्तारित कराने के लिए पुलिस अधीक्षक ने नया अभियान शुरू कराया है, जिसे नाम दिया गया है टॉरगेट सात साल। इसके तहत 2011 के बाद से अब तक दर्ज हुए ऐसे मामले चिह्नित किए जा रहे हैं, जिनकी विवेचनाएं लंबित हैं। विवेचना अधिकारियों के लक्ष्य निर्धारित करके उनसे विवेचना निस्तारित कराई जाएंगी।
दरअसल, घटनाएं होने पर रोजाना ही थानों में रिपोर्ट दर्ज होती हैं। थानों पर दर्ज मुकदमों को देखा जाए तो हर साल जिले भर में कई हजार मुकदमे दर्ज होते हैं। इसके सापेक्ष विवेचनाओं के निस्तारण की गति धीमी रहती है। इस कारण एक तरफ जहां पुलिस पर विवेचनाएं लंबित होने की वजह से दबाव बढ़ता है, तो मुकदमे के वादी भी न्याय के इंतजार में रहते हैं। इसी के चलते पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने विवेचनाओं के निस्तारण के लिए अभियान सात साल शुरू किया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विवेचना अधिकारियों को लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं। विवेचना समय से निस्तारित होंगी, तो पुलिस पर लिखा-पढ़ी का बोझ कम होगा।
रोजाना पूछी जा रही निस्तारण की प्रगति
अभियान सात साल के तहत विवेचना निस्तारण को लेकर प्रतिदिन प्रगति पूछी जा रही है। संबंधित थाने के सीओ से इसकी रिपोर्ट ली जाती है कि कितनी विवेचनाओं का निस्तारण हुआ और कितनी शेष रह गई। साथ ही यह रिपोर्ट भी ली जा रही है कि कितनी विवेचनाओं में चार्जशीट दाखिल की गई और कितनों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाई गई।