तौल केंद्र लिपिकों में मिल प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा
झिंझाना (शामली)। ऊन शुगर मिल के गन्ना क्रय केंद्रों के लिपिकों में मिल प्रबंधन के खिलाफ गुस्सा है। लिपिकों का आरोप है कि क्रय केंद्र से शुगर मिल में पहुंचने पर गन्ना तुलाई में फर्क दर्शाया जाता है, जिसका खामियाजा केंद्र के तौल लिपिकों को भुगतना पड़ रहा है। लिपिकों ने कहा कि ऐसी दशा में वह क्रय केंद्र पर कार्य नहीं करेंगे।
शनिवार को ऊन शुगर मिल के गन्ना क्रय केंद्रों के लिपिक झिंझाना के आर्य समाज मंदिर में इकट्ठा हुए। उन्होंने कहा कि हम क्रय केंद्रों पर तौल कराने नहीं जाएंगे। आरोप है कि गन्ना सेंटरों से गन्ना तौलकर मिल को भेजते हैं, जिसको मिल गेट पर लगे कांटे पर पांच क्विंटल कम तौला जा रहा है। इस तरह उनके वेतन से कटौती की जाती है। उनकी मांग है कि मिल के कांटे की शुद्धता की जांच के लिए बराबर में घर्मकांटा लगवाया जाए। मिल चालू होने के बाद पांच प्रतिशत गन्ने की सूखन दी जाए। तौल लिपिकों ने बताया कि शुक्रवार को धर्म कांटे पर तौल कर भेजी गई गन्ने से लदी गाड़ी का वजन 351 क्विंटल था, जबकि मिल गेट पर उसका वजन 346 क्विंटल आया, जिसके चलते पांच क्विंटल गन्ने का नुकसान तौल लिपिक के खाते में गया है। जब तक मिल गेट का कांटा ठीक नहीं होगा या बराबर में धर्मकांटा नहीं लगेगा, तब तक वह कार्य पर नहीं लौटेंगे। इस दौरान लिपिक यशपाल, नरेश कुमार, नीरज, जितेंद्र, अजय मनीष, पंकज, सुरेंद्र, विनय, विनोद, इस्तकबाल, लोकेंद्र, राहुल, प्रदीप, मुकेश, सुभाष, फूल अहमद, सरवर, अमन, विनीत, अशोक, रवित, अरविंद आदि मौजूद रहे है। उधर, ऊन शुगर मिल के महाप्रबंधक (केन) अनिल अहलावत ने बताया कि कुछ तौल लिपिक विवाद पैदा कर रहे हैं, जबकि अन्य लिपिक कार्य कर रहे हैं। शनिवार को ही 15 हजार क्विंटल गन्ना तौला गया है। उन्होंने कहा कि लिपिक अपनी संतुष्टि के लिए मिल के किसी भी तौल कांटे की जांच करा सकते हैं।