सरकारी अस्पताल में नसबंदी के आपरेशन के बाद तीन महिलाओं को उनके घर तक नहीं छोड़ने के मामला संज्ञान में आने पर सीएमओ बेहद नाराज हैं। उन्होंने मामले में एंबुलेंस के नोडल को जांच कर रिपोर्ट पेेश करने के आदेश दिए हैं। साथ ही एंबुलेंस के प्रभारी को मामले में दोबारा इस तरह की लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।
शामली सरकारी अस्पताल में सोमवार को नसबंदी कराने के लिए तीन महिलाओं को लाया गया था। तीनों का नसबंदी का आपरेशन होने के बाद उनको घर तक छोड़ने की जिम्मेदारी भी 108 या 102 एंबुलेंस की होती है, लेकिन महिलाओं के साथ मौजूद उनके परिजनों और आशाओं ने कई बार कॉल की थी, लेकिन उनको एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई गई। मामले को जब घंटों बीत गए, तब महिलाओं के परिजन मजबूरन टैक्सी किराए पर करके अपने घर ले गए। मामले की शिकायत सीएमओ डॉ. राजकुमार को कांधला के सीएचसी प्रभारी रमेश चंद्रा ने की थी। बुधवार के अंक में यह मामला अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ तो स्वास्थ्य विभाग में अफरातफरी मच गई। सीएमओ डॉ. राजकुमार इस मामले पर बेहद नाराज हुए। उन्होंने एंबुलेंस के नोडल डॉ. भानु को पूरे मामले में जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एंबुलेंस के प्रभारी मोहम्मद अरशद को आवश्यक दिशा-निर्देश देने के साथ चेतावनी भी दी कि पब्लिक की परेशानी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोबारा इस तरह की शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
एंबुलेंस गंदी न हो, बच्चे को चला दिया पैदल
शामली सीएचसी पर आपरेशन के बाद महिलाओं को घर छोड़ने का मामले का भले ही अब खुलासा हुआ हो, लेकिन एंबुलेंस की कारगुजारी इससे पहले ओर भी हो चुकी है। कांधला के सीएचसी प्रभारी डॉ. रमेश चंद्रा के अनुसार तीन दिन पूर्व कांधला के अंबेहटा में एक बच्चा बीमार हो गया था। परिजनों ने 102 एंबुलेंस बुलवाई तो एंबुलेंस के ड्राइवर ने घर से बहुत दूर एंबुलेंस को रोक दिया। घर से पैदल आने की बात कह दी। परिजनों ने महिला और बच्चा बीमार होने की कई बार दुहाई भी दी, लेकिन ड्राइवर ने यह कह दिया कि आगे रास्ते खराब है एंबुलेंस खराब हो जाएगी दोनों को यही ले आओ।