जिला अस्पताल है नहीं, सीएचसी भी बीमार
शामली। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे हैं। जिला बने सात साल हो गए, लेकिन जिला अस्पताल आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका। जिला बनने के बाद जहां एसएनसीयू (सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट) की सुविधा मिलनी चाहिए थी, मगर अभी तक एनबीएसयू (न्यू बॉर्न सिक यूनिट) से काम चलाना पड़ रहा है। नतीजतन ज्यादातर केसों को मुजफ्फरनगर या मेरठ रेफर करना पड़ता है।
शामली को जिला बने सात साल व्यतीत हो गए। जिला बनने के बाद से शामली अस्पताल जिला अस्पताल के रूप में काम कर रहा है, लेकिन सुविधा और संसाधनों के लिहाज से शामली अस्पताल काफी पीछे है। अस्पताल में रोजाना छह सौ से लेकर 800 तक ओपीडी के मरीज आते हैं। रोजाना औसतन 10 डिलीवरी होती हैं। हादसों में घायल लोगों को एफआरयू यूनिट होने के कारण शामली सीएचसी में लाया जाता है, मगर उनमें से 80 प्रतिशत को रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा डिलीवरी को आने वाली महिलाओं में मेजर ऑपरेशन के लिए मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
क्या है एनबीएसयू
न्यू बोर्न सिक यूनिट के रूप में शामली अस्पताल काम कर रहा है, जबकि जिला अस्पताल में एसएनसीयू यानि सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट होती है। बच्चों के उपचार के लिहाज से एनबीएसयू पर प्राथमिक सामान्य डिलीवरी और सामान्य आपरेशन होता है। यहां सिर्फ फोटो थेरेेपी मशीन तथा रेडिएंट वार्मर की सुविधा होती है।
अस्पताल में इंसूवेटर तक नहीं है...
शामली अस्पताल में डिलीवरी के दौरान जो बच्चे पैदा होते है, यहां पर उनको मैन्युअल आक्सीजन लगाया जाता है, लेकिन यहां पर इंसुवेटर नहीं है। इंसुवेटर लगाने के बाद जब तक सिलेंडर में ऑक्सीजन है, उस समय तक बच्चे की मौत ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
इन सुविधाओं का है अभाव
प्री मेच्योर यानि जो बच्चे समय से पूर्व ही जन्म लेते हैं तथा दो किलो से कम वजन वाले बच्चों को रखने तथा उनको उपचार देने के लिए यहां पर कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं है। इसके अलावा मेजर सर्जरी के लिए जो संसाधन होने चाहिए उनका भी यहां अभाव है।
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शामली अस्पताल सिर्फ एफआरयू यूनिट है, लेकिन जिला अस्पताल के बराबर काम रहा है। अल्ट्रासाउंड सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन फाइल भेजी गई है, लेकिन अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है -डाक्टर जगमोहन, चिकित्साधीक्षक, सीएचसी शामली।