अंधविश्वास के कारण फैली अफवाहों के कारण चोटी कटने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कभी साया दिखाई देता है, तो कभी बिल्ली, मगर खास बात यह है कि अधिकांश घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में ही हो रही हैं। शहरी क्षेत्र में और शिक्षित वर्ग में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया। स्पष्ट है कि यह सब अंधविश्वास के कारण हो रहा है। मनोरोग विशेषज्ञ और शिक्षित वर्ग के लोगों ने भी चोटी कटने की घटनाओं को सिरे से खारिज किया है।
जिले में चोटी कटने की घटनाएं एक के बाद एक बढ़ती जा रही हैं। बीते एक सप्ताह के दौरान ही दस से ज्यादा स्थानों पर चोटी कटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कांधला क्षेत्र के गांव डांगरोल में महिला की कमरे में चोटी कटने की घटना के बाद थानाभवन, कैराना और गढ़ीपुख्ता क्षेत्र में एक के बाद एक चोटी कटने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इन सभी घटनाओं में यह बात देखने को मिली कि जिस परिवार में घटना हुई, उसका मकान गांव के बाहरी छोर पर स्थित था। ऐसे परिवारों में चोटी कटी, जिनमें पढ़ाई लिखाई का स्तर भी ठीक नहीं है। अशिक्षा के कारण लोगों में यह अफवाह तेजी से फैल रही हैं कि कोई साया है, जो चोटी काट रहा है, जबकि मनोरोग विशेषज्ञ और पढ़ा लिखा तबका वैज्ञानिक युग में ऐसी किसी बात पर भरोसा करने की हामी नहीं भरता है।
पुलिस जांच करे, तो खुल सकती है पोल
चोटी कटने की घटनाओं को लेकर अभी पुलिस की तरफ से भी ढील बरती जा रही है। जितने भी घटनाएं सामने आई हैं, उनमें पुलिस ने जांच करने की जरूरत नहीं समझी। जबकि मौके की स्थिति और सच्चाई पता लगाने का प्रयास किया जाए, तो चोटी कटने की घटनाओं की पोल भी खुल सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि शरारती तत्व इस तरह की हरकतें करके, समाज में भय पैदा करने में लगे हैं।
मनोरोग विशेषज्ञ की राय
मस्तिष्क एवं मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण कुमार राय का कहना है कि यह कल्चर बाउंड सिंड्रोम का असर है, जिसमें व्यक्ति की सोच के मुताबिक मन में वही तस्वीर उभर जाती है। इसे इमेजरी साइक्लोजिकल इफैक्ट भी कहते हैं। अशिक्षित और देहाती लोगों में यह सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि वह अफवाहों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही वजह है कि शहरी इलाकों में चोटी कटने या बिल्ली दिखने की घटनाएं नहीं होती, बल्कि सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र में ही होती हैं। यदि शहरी और पढे़ लिखे तबके में कोई मामला सामने आए, तो सीसीटीवी से सच्चाई सामने आ सकती है।
शिक्षित तबके ने चोटी कटने को नकारा
- डॉक्टर अनुप्रिता सिंह का कहना है कि चोटी कटने की बातें देहात में ही चल रही है। शहरी क्षेत्र में ऐसा नहीं हो रहा, क्योंकि शिक्षित लोग ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देते।
- डॉक्टर मंजू मोहन का कहना है कि यह कोरा मन का वहम है, भूत प्रेत या साया नहीं होता। न कोई ऐसी अदृश्य शक्ति है, जो किसी के बाल काटे।
- डॉक्टर मृदुला जैन का कहना है कि कोई कीड़ा है, जो बाल काट देता है। गांवों में दवाओं का स्प्रे नहीं होता, जिस कारण गांव में ही बाल कटने की घटना हो रही हैं।
- डॉक्टर वंदना का कहना है कि विज्ञान का युग है, लोगों को समझना चाहिए कि तांत्रिक विद्या से किसी के बाल नहीं कट सकते हैं। अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
- डॉक्टर विवेक का कहना है कि चोटी कटने की घटनाएं बताकर लोग खुद को प्रचारित कर रहे हैं, जिससे अफवाहें फैल रही हैं। ऐसी हरकतें करने वालों को बाज आना चाहिए।
- मनोज कुमार का कहना है कि अंधविश्वास के कारण चोटी कटने की बातें कही जा रही हैं। हमें नहीं लगता कि कोई अदृश्य शक्ति बाल काट सकती है, यह सब लोगों के मन का वहम है।