अमर उजाला ब्यूरो
शामली। आर्य समाज शामली के 144वें तीन दिवसीय स्थापना दिवस का शुुुभारंभ वैदिक यज्ञ एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। इस अवसर पर भजन और प्रवचन हुए।
वैदिक यज्ञ में मुख्य यजमान सुभाष गोयल, सुदेश आर्य, संजीव आर्य, मिथलेश आर्य, अमरीश आर्य, सरोज आर्य, डाक्टर राजेंद्र आर्य, सुनीता पाल, राजपाल आर्य, कौशल्या आर्य, पूरणचंद आर्य रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डाक्टर रविदत्त शास्त्री रहे। इसके बाद नजीबाबाद से आई आर्य उपदेशक डाक्टर प्रियंवदा वेदभारती ने कहा कि परमात्मा का ज्ञान न तो कभी समाप्त नहीं होता है और न ही पुराना। संस्कृत केवल भाषा नहीं है अपितु दैवीय ज्ञान है। उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य को अपने अस्तित्व को बचाए रखना है तो वेदों के अनुसार जीवन यापन करना चाहिए। वेदों में सारभौमिक शिक्षाएं विद्यमान है। उन्होंने कहा कि आर्य गुणवाचक शब्द है, जाति वाचक नहीं है। वेद की आज्ञाओं का पालन करने से ही जीवन सफल होगा। वेदों का पढ़ना, सुनना और सुनाना सभी आर्यों का परम धर्म है। उन्होंने गाय और गुरुकुल देश की संस्कृति बताते हुए कहा कि वेदों की रक्षा के लिए व्याकरण सीखना बहुत आवश्यक है।
इस अवसर पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, पूरणचंद आर्य, आर्य समाज के प्रधान विनोद आर्य, मंत्री देवेंद्र देव आर्य, कोषाध्यक्ष रविकांत आर्य, आर्य विद्या सभा के प्रधान राजपाल आर्य, मंत्री दिनेश आर्य, कोषाध्यक्ष रामेश्वर दयाल आर्य, वेदप्रकाश आर्य, युवक परिषद के प्रधान सूर्यप्रताप आर्य, मंत्री उत्सव आर्य, कोषाध्यक्ष शुभम आर्य, कौशल्या आर्य, नीलम आर्य, उषा आर्य, श्वेता आर्य, मृणाली आर्य, प्राची आर्य, अवंतिका आर्य आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक राजपाल आर्य ने बताया कि शनिवार सुबह साढ़े सात बजे से साढ़े नौ बजे तक यज्ञ, भजन और प्रवचन होंगे। रात आठ बजे से दस बजे तक भजन एवं प्रवचन और 14 अप्रैल को सुबह साढ़े सात बजे से साढ़े 11 बजे तक 31 कुंडीय विराट यज्ञ का आयोजन किया जाएगा।