पापा के विश्वास को कभी टूटने नहीं दूंगा
रोहित अग्रवाल
शामली। मेरे पापा को मुझ पर पूरा भरोसा था। उन्हें भरोसा था कि यदि कुछ हो गया तो मैं उनके पीछे पूरे परिवार को संभाल लूंगा। मैं सबको साथ लेकर चल सकता हूं। उनका ये भरोसा ओर विश्वास कभी नहीं टूटने दूंगा।
शहीद प्रदीप के करीब 18 साल के बड़े बेटे सिद्धार्थ के कंधे पर सोमवार को परिवार की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। तेरहवीं के दौरान जब समाज के लोगों ने सिद्धार्थ को जिम्मेदारी भरी पगड़ी दी, तो वहां मौजूद हर शख्स शायद यही सोच रहा था कि पढ़ने लिखने की उम्र में ये मासूम इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे निभाएगा। ये सोचकर बहुत लोग भावुक भी हुए। तेरहवीं के बाद जब सिद्धार्थ से बात की गई. तो उसने जता दिया कि वो छोटा जरूर है. लेकिन उसके इरादे बड़े और मजबूत हैं। उसने अपने मन की बात मीडिया से साझा की। बताया कि मेरे पापा को मुझसे पूरी उम्मीद थी कि वो आगे जाकर कुछ बनेगा । उन्हें पूरा भरोसा था कि यदि उन्हें कुछ हो गया मैँ (सिद्धार्थ) पूरे परिवार को संभाल सकता हूं। सबको एक साथ लेकर चल सकता हूं। पापा चाहते थे कि पूरा परिवार हमेशा साथ रहे। भाइयों में कभी लड़ाई झगड़ा ना हो। सब एक साथ रहें। चूल्हे अलग ना जले। पापा जब भी छुट्टी पर आते हमसे अपने मन की यही बात कहते थे। वो अपने पापा का भरोसा और विश्वास कभी नहीं टूटने देगा। अपनी मम्मी और भाई का हमेशा ध्यान रखूंगा।
सीए बनना ही उसकी प्राथमिकता
पापा का सपना था मैं चार्टेड एकाउंटेंट बनूं । अब पापा नहीं हैं, लेकिन वो उनका सपना जरूर पूरा करेगा। अब उसके लिए सरकारी नौकरी की बात आ रही है। परिवार रिश्तेदार सब सर्विस के बारे में विचार कर रहे हैं। हालांकि जॉब परिवार और उसके लिए एक सिक्योरिटी बन जाती है, इसलिए यदि बड़े बुजुर्ग चाहेंगे तो वो सर्विस करेगा, लेकिन सीए बनना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए यदि केंद्र सरकार बैंक में क्लर्क आदि की सर्विस भी दे तो वो सर्विस के साथ पढ़ाई भी कर सकता है, लेकिन वो अपने पापा का सीए बनने का सपना जरूर पूरा करेगा।
बेटों की परीक्षा के कारण जल्दी कर दी तेरहवीं
शहीद प्रदीप के दोनों बेटों की बोर्ड परीक्षा के कारण शहीद की तेरहवीं जल्दी कर दी गई। परिजनों ने बताया कि सिद्धार्थ गाजियाबाद के गोविंदपुरम कमला नेहरू नगर के केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 12 और विजयंत कक्षा नौ में पढ़ता है। सिद्धार्थ के पेपर दो मार्च से हैं। जबकि विजयंत के एक से। इस दुखद हादसे के कारण उनकी पढ़ाई भी बाधित हो रही है। शहीद प्रदीप के पिता जगदीश ने बताया कि प्रदीप के दोनों बेटे होनहार हैं। उनकी परीक्षा एक मार्च से हैं पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। बेटे अपने पापा का सपना पूरा करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने उनकी परीक्षा की वजह से ही तेरहवीं जल्दी कर दी।