कैराना। गौशाला भवन में चल रही रामलीला महोत्सव के 10वें दिन रामलीला का शुभारंभ प्रशांत मित्तल और मयंक मित्तल (नोएडा) ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
रामजी गंगा पर पहुंचकर नाव से केवट को गंगा पार कराने के लिए कहते हैं। राम की अत्यधिक प्रार्थना के बाद केवट अपने परिवार के साथ गंगा पार करा देता है और प्रभु के चरण स्पर्श करता है। उधर भरत को ननिहाल में सपना दिखता है कि अयोध्या में कोई बड़ा संकट आ गया है। भरत और शत्रुघ्न अयोध्या पहुंच जाते हैं। भरत बहुत दुखी होकर अपनी माता कैकेयी के पास जाकर कारण जानते हैं। जब भरत और शत्रुघ्न दोनों को इस बात का पता लग जाता है तो शत्रुघ्न क्रोधित होकर दासी मंथरा को क्रोधित होकर धक्का दे देते हैं। अपने भाई राम को अयोध्या वापस लाने के लिए वन में जाते हैं। भरत माता सहित राम की कुटिया तक पहुंच जाते हैं। भरत राम को गले लगा कर अयोध्या चलकर कार्य संभालने के लिए बोलते हैं। राम पिता धर्म का पालन करने की बात करते हैं और भरत जी के साथ चलने से मना कर देते हैं।
भरत का अभिनय रोहित, शत्रुघन आयुष, केवट राजेश नामदेव, अभिषेक गोयल, संजू वर्मा ,घनश्यामदास गोयल, राकेश गर्ग, राम सतीश प्रजापति, लक्ष्मण राकेश प्रजापति, सुमंत अजेश, सीता शिवम गोयल, मंथरा अजेश, राजगौ रविंदर ने किया। इसके अलावा कमेटी के सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे।