शामली। न यातायात नियमों का पालन और न किसी कार्रवाई का डर। तभी तो जिले में स्कूली वाहन नौनिहालों की जिंदगी से खेल रहे हैं। शनिवार को अलग अलग स्थान पर हुए हादसों में स्कूली वाहन चालकों की वजह से दो जिंदगी खत्म हो गईं, जबकि पूर्व में भी ऐसे हादसे होते रहे हैं। ताज्जुब है कि स्कूली वाहनों के लिए नियमों का पालन कराने वाले भी मौन हैं। शनिवार दोपहर कैराना में कक्षा तीन के छात्र अब्दुल्ला की मौत के मामले में बस चालक की लापरवाही सामने आई। बस से अब्दुल्ला उतरा ही था कि चालक ने बस चला दी, जबकि बच्चों को स्कूल वाहन से उतारते समय तब तक वाहन नहीं चलना चाहिए, जब तक बच्चा वाहन से दूर न पहुंच जाए। इतना ही नहीं, स्कूल वैन में बच्चों को सवार कराने और उतारने के लिए हेल्पर भी होना चाहिए। यदि इन नियमों का पालन किया जाता, तो शायद अब्दुल्ला की जान नहीं जाती। वहीं, कैराना -तितरवाडा मार्ग पर तेज गति से जा रही स्कूल वैन (टाटा मैजिक) की टक्कर से बाइक सवार छात्र शुएब की मौत भी इसी तरह की लापरवाही का नतीजा रही।
उधर, जिले में 30 से ज्यादा स्कूली वाहन ऐसे हैं, जो अनफिट है। उनके फिटनेस प्रमाण पत्र एआरटीओ कार्यालय से नहीं लिया जा रहा है। एआरटीओ की तरफ से इन वाहनों के संचालकों और स्कूल प्रबंधनों को नोटिस तो भेजे गए। एआरटीओ मुंशीलाल का कहना है कि फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं लेने वाले स्कूल वाहनों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं। पूर्व में भी चेकिंग करके स्कूल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। भविष्य में भी चेकिंग कराई जाएगी।