शामली। वैसे तो केंद्रीय चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनाव में देशभर में ईवीएम-वीवीपैट से मतदान कराने की तैयारियां कर रखी हैं, लेकिन कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में पहली बार इस प्रणाली का इस्तेमाल शामली जिले में होगा। शामली जनपद कई मायनों में संवेदनशील रहा है। साथ ही पूर्व के चुनावों में विवाद भी सामने आते रहे हैं। इस लिहाज से कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में प्रत्येक मतदान केंद्र पर ईवीएम-वीवीपैट का इस्तेमाल महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि इस प्रणाली में मतदाता को वोट डालने पर वीवी पैट की मदद से मतदाता को पता चल जाता है कि उसका वोट किसे गया है। गौरतलब है कि शामली जनपद में 2012 के विधानसभा, 2014 के लोकसभा चुनाव और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल तो हुआ था, लेकिन वीवी पैट का इस्तेमाल नहीं किया गया था। पहली बार कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में ईवीएम के साथ ही वीवी पैट का इस्तेमाल होगा।
ऐसी है ईवीएम-वीवीपैट प्रणाली
पूर्व में बैलेट पेपर से मतदान होता था, जिस पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए बैलेट पेपर पर अपने प्रत्याशी के पक्ष में मुहर लगाता था। अब इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिये मतदान होगा। ईवीएम में प्रत्याशियों के चुनाव निशान के सामने बटन होते हैं, जिसे दबाकर मतदान किया जाता है। मगर, उससे मतदाता को यह पता नहीं चलता कि उसके द्वारा किया गया मतदान सही हुआ है या नहीं। वहीं, वीवीपैट (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन से मतदाता को इसका पता चल जाता है। वीवी पैट मशीन को ईवीएम से जोड़ा जाता है, जिससे मतदान के 7 सेकेंड तक मतदाता को वह पर्ची दिखाई देगी, जिस पर उसके द्वारा किए गए मतदान का पता चल जाएगा। इसके बाद पर्ची वीवी पैट के बॉक्स में गिर जाती है।