अमर उजाला ब्यूरो
शामली। गुर्दा (किडनी) के रोगियों को उपचार के लिए अब बाहर दूसरे बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। निर्माणाधीन जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की जाएगी। इस यूनिट के शुरू होने पर सात मरीज एक साथ निशुल्क डायलिसिस करा सकेंगे। डायलिसिस यूनिट की स्थापना के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार द्वारा अनुबंधित संस्था की टीम ने शामली पहुंचकर मुख्य चिकित्साधिकारी से मिलकर यूनिट के बारे में जानकारी दी है।
शामली जिला मुख्यालय पर पूर्वी यमुना नहर पटरी 100 बैड का जिला अस्पताल के भवन का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले महीने तक जिला अस्पताल में ओपीडी शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में गुर्दा रोगियों की सुविधा के लिए डायलिसिस यूनिट की स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर संजय भटनागर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा दिल्ली की प्राइवेट संस्था संजीवनी से डायलिसिस यूनिट बनाने का अनुबंध किया गया है। तीन दिन पहले संस्था की टीम शामली में आकर उनसे मिल चुकी है।
अनुबंध के मुताबिक प्रशासन की तरफ से संस्था को भूमि और भवन उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद संस्था के चिकित्सक यूनिट लगाकर गुर्दा रोगियों का उपचार करेंगे। गुर्दा रोगियों के उपचार के खर्च का भार प्रदेश सरकार वहन करेगी और रोगियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि डायलिसिस यूनिट के लिए ग्राउंड भूमि पर भूमि की जरूरत होगी। इसमें दो वार्ड बनेंगे, जिसमें 24 घंटे पानी की सप्लाई की व्यवस्था रहेगी। यूनिट के लिए जिला अस्पताल के बराबर में ही भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने संस्था की टीम को यूनिट के भवन का नक्शा और अन्य डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है। शासन से स्वीकृति मिलने पर डायलिसिस यूनिट की स्थापना का काम शुरू हो जाएगा।
क्या है डायलिसिस
शामली। डायलिसिस रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। इस डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है, जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम नहीं करते हैं। गुर्दे से जुड़े रोग, लंबे समय से मधुमेह के रोगी, उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों में बार-बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है।
एक बार की डायलिसिस में आता है दस हजार तक का खर्चा
शामली। सीएमओ डाक्टर संजय भटनागर ने बताया कि जिले में अभी तक डायलिसिस की सुविधा न होने के कारण गुर्दा रोगियों को दूर के शहरों मेरठ, पानीपत, करनाल, दिल्ली आदि में जाना पड़ता है। जिसमें पांच से दस हजार रुपये तक का खर्चा आता है। जिले में डायलिसिस यूनिट की स्थापना होने से मरीजों को निशुल्क सुविधा मिलेगी। एक बार में सात रोगियों को यह सुविधा दी सकेगी।