शामली/कैराना। यमुना खादर में दशकों से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान के लिए प्रशासन ने पहल की है। प्रशासन ने विवादित भूमि की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी है, जिसमें सर्वे आफ इंडिया की ओर से निशानदेही कराने का आग्रह किया गया है। इसके बाद करीब चार दशक बाद क्षेत्र के किसानों में भी भूमि समाधान की उम्मीद जगी है।
सन 1976 में यूपी और हरियाणा सीमा विवाद के समाधान के लिए दीक्षित अवार्ड का गठन हुआ था। जिसमें यमुना के मध्य जलधारा को दोनों प्रदेशों की सीमा मानते हुए यमुना के बीच सीमांकन पिलर लगाए गए थे, जिसके बाद यमुना की जलधारा बदलने के साथ ही दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच भूमि विवाद शुरू हो गया। कई बार दोनों प्रदेशों के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक भी होती रही, लेकिन सीमा विवाद का कोई हल नहीं निकल सका। गत वर्ष हरियाणा के किसान यूपी प्रशासन द्वारा कुर्क की गई सैकड़ों बीघा फसल को भी काट ले गए थे। जब भी सीमा पर फसल तैयार होती है, तो वहां पर तनाव की स्थिति बन जाती है।
अब स्थानीय प्रशासन ने सीमा विवाद के स्थायी हल के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं। प्रशासन ने विवादित भूमि की रिपोर्ट तैयार कराई है, जिसके बाद उसे शासन को भेज दिया गया है। शासन से आग्रह किया गया है कि सर्वे आफ इंडिया की ओर से निशानदेही कराई जाए, जिससे विवाद का हल निकल सकें और किसानों के बीच चले आ रहे संघर्ष पर विराम लगाया जा सके। एसडीएम डा. अमित पाल शर्मा ने बताया कि डीएम के माध्यम से शासन को विवादित भूमि के हल के लिए रिपोर्ट प्रेषित की गई है। सर्वे आफ इंडिया की ओर से निशानदेही को कहा गया है, ताकि विवाद खत्म किया जा सके।
फिर अफसरों से मिले किसान
शनिवार को कोतवाली में आयोजित थाना समाधान दिवस में हरियाणा के संभालखा निवासी हाल निवासी मवी उप्र पवन सिंह व महिपाल ने एसडीएम को शिकायती पत्र दिए। उन्होंने बताया कि पवन सिंह की 32 बीघा और महिपाल की 15 बीघा भूमि क्षेत्र के गांव मवी में स्थित है, जहां पर हरियाणा के किसानों ने कब्जा कर रखा है, जिस कारण वह खेती-बाड़ी भी नहीं कर पा रहे हैं। हरियाणा के किसान उन्हें दौड़ा देते हैं। एसडीएम ने उन्हें आश्वासन दिया है।
मंगलवार को होगी पैमाइश
विवादित भूमि से अलग भी कई किसानों की भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ है। एसडीएम ने बताया कि इस कब्जे को हटवाने के लिए मंगलवार को प्रशासन की ओर राजस्व टीम पुलिस बल के साथ मौके पर जाकर भूमि की पैमाइश करेगी, जिसके बाद उसकी निशानदेही की जाएगी। यदि कोई इसका विरोध करेगा या अड़चनें पैदा करेगा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।