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शहीद प्रवेंद्र के परिवार में नहीं मिली नौकरी, सरकार की उदासीनता से परिजन निराश

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शामली। करीब 18 साल पहले देश के लिए शहीद हुए शामली के लाल प्रवेंद्र कुमार निर्वाल के परिजन सरकार की उदासीनता से निराश और मायूस है। परिजनों का कहना है कि सेना के अधिकारियों ने उस समय शहीद के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन उनके परिवार के किसी सदस्य को आज तक कोई नौकरी नहीं मिली।
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शामली के मोहल्ला रेलपार निवासी प्रवेंद्र कुमार निर्वाल 1999 में मेरठ से सेना की 12 जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। एक साल की ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग जयपुर में हुई थी। 28 दिसंबर 2001 में जैसलमेर लोंगोवाला में बार्डर पर बारूदी सुरंग विस्फोट में प्रवेंद्र शहीद हो गए थे। शहीद के बड़े भाई जितेंद्र ने बताया कि उस समय शहीद हुए भाई का शव लेकर शामली पहुंचे सेना के अधिकारियों ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिलाया था। शहीद प्रवेंद्र के अविवाहित होने के कारण बड़े भाई जितेंद्र के शैक्षिक कागजात के साथ ही सेना के अधिकारियों ने उनकी शारीरिक जांच और माप कराई थी, लेकिन आज तक नौकरी के लिए कोई बुलावा नहीं आया। बकौल जितेंद्र उन्होंने सेना के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से घोषणा न होने के कारण वे उन्हें नौकरी नहीं दे सकेंगे।
उनके पिता धर्मवीर निर्वाल ने भी अधिकारियों से कहा था कि एक बेेेटा तो उनका देश के लिए शहीद हो गया, लेकिन वे दूसरे बेटे को भी सेना में भेजना चाहते है, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई। करीब दो वर्ष पूर्व धर्मवीर का निधन हो चुका है। प्रवेंद्र के शहीद होने के बाद उनके पिता को जो पेंशन मिल रही थी, वह भी बंद हो गई। जितेंद्र ने बताया कि परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा आयुष इंटर करने के बाद स्टेट लेवल पर शूटिंग प्रतियोगिता में कई बार प्रतिभाग कर चुका। जबकि छोटा बेटा अमन कक्षा-9 में पढ़ता है। बड़ी बेटी आकांक्षा भी पढ़ रही है। उनके पास परिवार के गुजारे के लिए करीब आठ-दस बीघा खेती ही सहारा है। इसके अलावा रोजगार का कोई साधन नहीं है।
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खेत में बनी है शहीद प्रवेंद्र की समाधि
जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने अपने शहीद भाई की समाधि कुड़ाना रोड पर अपने खेत में बनाई है। इसमें शासन-प्रशासन का कोई सहयोग नहीं रहा। कुड़ाना मोड़ पर शहीद प्रवेंद्र की प्रतिमा लगाई गई है। प्रतिमा स्थल पर शहीद की पुण्यतिथि पर हर साल हवन का आयोजन होता है और समाधि पर तिरंगा फहराया जाता है।
भतीजे को भी नौकरी से किया इंकार
शामली। जितेंद्र निर्वाल ने बताया कि उन्होंने अपने बड़े बेटे के लिए भी सेना के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने भतीजे के लिए नौकरी का प्रावधान न होना बताकर लौटा दिया। इससे उन्हें निराशा ही हाथ लगी है।
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