थानाभवन। जुनून और जोश के सामने लाचारी कुछ भी नहीं है। विपरित परिस्थितियों और कठिनाइयों से जूझने वाला ही मुकद्दर का सिकंदर है। यह साबित कर दिखाया है कस्बे की दिव्यांग सोमा देवी ने। 65 वर्षीय सोमा देवी दिव्यांग होने के बावजूद अपने बेटे प्रवीण के साथ मतदान करने पहुंची। बताया कि सोमवार को लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान की जानकारी पर उसने मन में ठाना था कि वह अपने अधिकार का प्रयोग जरूर करेंगी। मां की हिम्मत देख बेटे प्रवीण ने सोमा देवी को हाथों में उठाया और करीब 500 मीटर की पैदल दूरी तय कर मतदान केंद्र लेकर आया। सोमा देवी ने बताया कि मतदान करना उनका अधिकार है और यही वजह है कि अपनी पीड़ा को दरकिनार करते हुए देशहित के बारे में सोचा। वहीं, कस्बे के ही दोनों पैरों से दिव्यांग मोहम्मद शाहिद ने अपनी लाचारी को मात देकर मतदान में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि कई लोग आलस्य या अपने दैनिक कार्यों के चलते मतदान जैसे महत्वपूर्ण कार्य से परहेज करते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बताया कि वह दिव्यांग होने के कारण चलने में असमर्थ हैं ऐसे में उन्होंने मोहल्ले से ही मतदान करने जा रहे एक युवक से सहारा लिया और उनकी पीठ पर बैठकर मतदान करने पहुंचा।