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Shamli News: 14 गवाह, 224 पन्नों की चार्जशीट और 152 तारीखों के बाद सजा

Tue, 18 Aug 2026 12:43 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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कैराना। दोहरे हत्याकांड में कुल 14 गवाह पेश किए गए। इनमें मृतक भूपेंद्र की मां सुरेश देवी और सिपाही सोनू की गवाही अहम रही। इसके अलावा अभियोजन पक्ष की ओर से 14 अन्य गवाह भी अदालत में पेश किए गए। करीब चार साल तक चली कानूनी प्रक्रिया में मामले की सुनवाई के दौरान करीब 152 तारीखें पड़ीं, जिसके बाद अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई। इस मामले में 224 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसमें रुपयों के विवाद को हत्याकांड की प्रमुख वजह बताया गया था। पुलिस की जांच के अनुसार रुपये वापस नहीं करने को लेकर विवाद बढ़ा, जिसके बाद पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई।
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आर्थिक तंगी में है सुरेश का परिवार
सुरेश देवी के अनुसार भूपेंद्र पहले पशुओं की डेयरी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी हत्या के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह सुरेश देवी, पुत्रवधू दुर्गेश और पोती शगुन पर आ गई। भूपेंद्र की मौत के बाद परिवार आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा है।


ग्रामीण बोले, आज भी याद है पिता-पुत्र की पिटाई
मखमूलपुर के ग्रामीणों ने बताया कि घटना का वह मंजर आज भी उनकी आंखों के सामने है। उनके सामने ही घायल पिता-पुत्र को पीटते हुए ले जाया जा रहा था। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उस समय सभी को लगा था कि पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और अब पिता-पुत्र को बचा लिया जाएगा। इसलिए किसी ने आगे बढ़कर रोकने का प्रयास नहीं किया। ग्रामीण ने कहा कि आज भी मन में यह सवाल उठता है कि यदि उस समय वे हिम्मत करके बीच-बचाव करते तो शायद भूपेंद्र और अर्जुन की जान बच सकती थी।
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सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस रही तैनात
कैराना। दोहरे हत्याकांड में सोमवार को फैसले के मद्देनजर कचहरी परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पीएसी के जवान भी तैनात रहे।

हत्यारों के चेहरे पर नहीं थी शिकन
सजा सुनाए जाने के बाद भी हत्यारों के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। चारों आराम से पुलिसकर्मियों के साथ जाते नजर आए। उधर, सजा के बाद सुरेश देवी की आंखें जरूर नम थी।
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