जल निगम ने अत्याधुनिक वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित की है।15 दिन के अंदर जांच शुरू होगी। अभी 6 पैरामीटर की ही जांच की जा रही थी। अत्याधुनिक मशीनें भी लैब में स्थापित की गईं हैं।
पानी के हेवी मेटल समेत अन्य पैरा मीटर की जांच के लिए अब लोगों को मेरठ या फिर गाजियाबाद के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शामली में ही जांच हो सकेगी। इसके लिए जल निगम के अधिकारियों ने सिंभालका में अत्याधुनिक वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित की है। जिसमें मात्र 48 घंटे के अंदर पानी के सभी पैरा मीटरों की जांच कराई जा सकेगी। 15 दिन के अंदर लैब को शुरू करा दिया जाएगा। इसके लिए लैब में एक टीम की भी तैनाती कर दी गई है।
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जल निगम ने रेलपार कॉलोनी में पानी के नमूनों की जांच के लिए लैब स्थापित की हुई है। जो पिछले कई सालों से चल रही है। लेकिन लैब में अत्याधुनिक सुविधाएं नहीं होने के कारण यहां सिर्फ पीएच, टर्बीडीटी, टीडीएस, टोटल हार्डनेस, आयरन, क्लोराइड आदि की जांच ही हो पाती थी। हेवी मेटल और अन्य जांचों के लिए मेरठ या फिर गाजियाबाद सेंपल को लेकर जाना पड़ता था।
लैब इंचार्ज अमित कुमार और टेक्नीशियन मनीष ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर सिंभालका में अत्याधुनिक वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित स्थापित कर दी गई है। जिसमें अत्याधुनिक मशीनें भी मंगवाई गई है।
48 घंटे के अंदर ही जांच रिपोर्ट लोगों को दी जा सकेगी। 15 दिन के अंदर लैब को शुरू करा दिया जाएगा। जल निगम के एक्सईएन मो. हाशिम अख्तर का कहना है कि लैब का लोगों को फायदा होगा। प्रयास रहेगा कि लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाए। जल्द लैब को शुरू करा दिया जाएगा।
हर माह होती है 300 सेंपल की जांच
लैब इंचार्ज अमित कुमार ने बताया कि हर साल 300 सेंपल की जांच की जाती है। जिनमें स्कूलों के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र, हैंडपंप, लोगों के घरों के पानी के नमूने शामिल होते हैं। लोगों से भी अपील की है कि साल में दो बार अपने हैंडपंप या फिर टंकी के पानी की जांच अवश्य कराएं। यह जांच 600 रुपये देकर कोई भी करा सकता है। व्यक्ति को इसके लिए एक लीटर पानी लाना होगा।
दूषित पानी पीने से बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा
एसीएमओ डाॅ. अतुल बंसल के अनुसार, दूषित पानी पीने से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है, जिसकी वजह से हैजा, टाइफाइड, पेचिश, डायरिया जैसी बीमारियां आसानी से किसी को भी अपना शिकार बना सकती हैं। इसके अलावा गंदा पानी पीने से वायरल इंफेक्शन भी हो सकता है। वायरल इंफेक्शन के कारण हेपेटाइटिस ए, फ्लू, टायफाइड, पीलिया जैसी खतरनाक बीमारियां होती हैं। ऐसे में पानी की जांच बहुत जरूरी है।