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भाई की शादी में एक महीने की छुट्टी लेकर आऊंगा

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रोहित अग्रवाल
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शामली। पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद अमित के अंदर बचपन से ही सेेना में जाने की चाहत थी। 2017 में भर्ती हुआ। ट्रेनिंग के दौरान ही भाई की शादी पड़ रही थी, लेकिन छुट्टी नहीं मिली। पिता ने अफसरों से बात करनी चाही तो खुद अमित ने ही रोक दिया। कहा पिता ये ट्रेनिंग ही तो उसकी ताउम्र काम आएगी। दो भाइयों की शादी होनी हैं उसमें एक महीने की छुट्टी लेकर आऊंगा। बेटे का ये देशभक्ति का जज्बा देख पिता भी पीछे हट गए। 12 फरवरी को छुट्टी के बाद लौटते वक्त भी मां से कह गया भाई का रिश्ता ले लो, एक महीने की छुट्टी लेकर आऊंगा, लेकिन अमित की ये चाहत अधूरी ही रह गई।
परिजनों के अनुसार अमित को बचपन से ही फौज में जाने की इच्छा रखता था। जहां भी फौजी को देखा उससे हाथ मिलाना और बात करना उसे अच्छा लगता था। शहर के कालेज से बीएससी कर रहा था कि उसने सीआपीएफ में भर्ती का आवेदन किया। 2017 में उसकी भर्ती सीआरपीएफ में हो गई। दिसंबर 2017 में रामपुर में उसकी ट्रेनिंग हुई। इसी दौरान उसके बड़े भाई अर्जुन का रिश्ता तय हो गया। फरवरी 2018 में शादी थी, लेकिन अमित को ट्रेनिंग के कारण छुट्टी नहीं मिली। पिता ने छुट्टी के लिए सीआरपीएफ के अफसरों से बात करनी चाहिए लेकिन खुद अमित ने ही मना कर दिया। पिता के अनुसार अमित ने कहा कि पिताजी ये ट्रेनिंग ही उसके जीवन भर काम आएगी। दो भाई ओर हैं उनकी शादी में आ जाऊंगा। अमित की अपने काम के प्रति निष्ठा देख पिता ने भी छुट्टी के प्रयास नहीं किए। अमित के बिना ही अर्जुन की शादी हुई।
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महत्वपूर्ण
अमित को ट्रेनिंग के दौरान एक भाई की शादी में आने को नहीं मिली थी छुट्टी
पिता ने अफसरों से बात करने को कहा तो रोक दिया

भाई का रिश्ता ले ले मां, शादी में एक महीने को आऊंगा
पिता सोहनपाल के अनुसार अमित 24 जनवरी को ही 20 दिन की छुट्टी लेकर आया था। मिलनसार होने के कारण वो आस पड़ोस के अपने दोस्तों के यहां भी गया। रिश्तेदारी में भी घूमकर आया। छुट्टी खत्म होने के बाद 12 फरवरी को जब वो वापस जाने लगा तो उसकी मां की आंखें भर आईं। उसके दो छोटे भतीजे भी लिपट गए। माहौल बहुत भावुक हो गया था, ये देख अमित ने ही परिजनों को संभाला। उसने माहौल हल्का करते हुए अपनी मां से कहा अरी मां क्यों चिंता करती है। जल्दी से भाई का रिश्ता ले ले फिर शादी में एक महीने की छुट्टी लेकर आऊंगा।

जान से ज्यादा प्यार करता था भतीजी-भतीजे से
परिजनों के अनुसार अमित के बड़े भाई प्रमोद के दो बच्चे हैं। इनमें 10 साल की भतीजी कांति और आठ साल के भतीजे आयूष को वो बहुत प्यार करता था। जब भी घर आता इन दोनों के लिए कुछ ना कुछ लाता था। ये दोनों बच्चे भी उसे चाचू कहते थे। अमित के जाने की खबर से ये बच्चे भी बहुत मायूस थे।

परिवार ने बेेचैनी में जागकर काटी पूरी रात
शामली। बृहस्पतिवार को पुलवामा में आतंकी हमले की खबर मिलते ही अमित का परिवार चिंतित हो गया था कई बार प्रयास के बाद भी उसका फोन नहीं मिला तो बेचैनी बढ़ी। थाने गए तो वहां से भी कुछ पता नहीं चला। जीआरपीएफ मुख्यालय से कोई सूचना नहीं आई थी इसलिए मन को दिलासा देते रहे कि शायद अमित ठीक हो, रात भर इसी उधेड़बुन में काटी। सुबह सवा छह बजे सीआरपीएफ मुख्यालय से आए फोन ने परिजनों की आशंका को सही साबित कर दिया।
अमित के पिता सोहनपाल के अनुसार छुट्टी के बाद 12 फरवरी को अमित वापस गया था। वो शामली ट्रेन से दिल्ली और वहां से जम्मू गया था। 13 फरवरी की शाम को उससे फोन पर बात हुई। बताया कि वो अपने जम्मू हेडक्वार्टर में। खाना खा लिया और अब आराम कर रहा है। उसने घर में माता पिता, भाइयों और भतीजों से भी बात की, लेेकिन बृहस्पतिवार शाम को जब पुलवामा में आतंकी हमले की सूचना आई तो उन्होंने अमित का फोन मिलाया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। शहीदों की लिस्ट में अमित का नाम भी था लेकिन उसमें पिता का नाम नहीं लिखा था। फोन मिल नहीं रहा था। थाने जाकर बात की तो बताया गया कि उनके पास भी कोई सरकारी सूचना नहीं है। पूरी रात वे इसकी चिंता में रहे। पूरा परिवार रात को जागता रहा। मन में तरह तरह के सवाल उठ रहे थे, लेकिन सीआरपीएफ मुख्यालय से भी कोई सूचना नहीं मिली थी इसलिए ये भी लगता रहा कि शायद अमित के साथ कुछ ना हुआ हो। इसी उधेड़बुन में लगे थे कि सुबह सवा छह बजे जैसे ही सीआरपीएफ मुख्यालय से फोन आया और उन्होंने अमित की शहादत की सूचना दी तो परिवार में कोहराम मच गया।
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नाम - अमित कुमार
पिता - सोहनपाल
माता - उर्मिला
उम्र - करीब 21 साल
पता - रेलपार कालोनी शामली
रेंक - 92 वीं बटालियन सीआरपीएफ
भाई - चार
बहन - एक

पूरा गांव परिवार को सांत्वना देने पहुुंचा
शामली। अमित के परिवार में पांच भाई हैं। अमित सबसे छोटा है। सबसे बड़े भाई का नाम प्रमोद है। जिसकी बिजली की दुकान है। अर्जुन फोटोग्राफी करता है और एक भाई अनिल प्राइवेट टीचर है। भाई सुनील घर पर ही रहता है। इनमें प्रमोद और अर्जुन की शादी हो चुकी है। प्रमोद के दो बच्चे हैं। एक बहन मीनाक्षी है जो शादीशुदा है। पिता घर में ही रहते हैं। मां उर्मिला देवी गृहणी है। अमित की शहादत की खबर पर गांव के लोग महिलाएं परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे थे। सभी में बहुत गुस्सा था।
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