अमर उजाला ब्यूरो
शामली। डीजल-पेट्रोल, गैस और बिजली के बढ़ोत्तरी को देखते हुए जिले के किसान अधिक मूल्य की आस लगाए बैठे थे। मगर इस साल गन्ना मूल्य न बढ़ने से जिले के किसान मायूस है। 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए इस साल किसान 350 रुपये से लेकर 400 रुपये क्विंटल गन्ने मूल्य की उम्मीद लगाए बढ़े थे, मगर इस बार प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने से किसान मायूस हो गए हैं।
पेराई सत्र 2018-19 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य एसएपी बिना किसी बढ़ोतरी के घोषित कर दिया है, किसानों को पिछले साल के भांति इस साल भी रिजेक्टिड प्रजाति के लिए 310 रुपये क्विंटल सामान्य प्रजाति के लिए 315 रुपये प्रति क्विंटल एवं अगेती के लिए 325 रुपये क्विंटल ही मिलेगा। गन्ना किसानों के मामले में सरकार द्वारा किया गया कोई वायदा पूरा नहीं हुआ है। भाजपा के नेता विपक्ष में रहते हुए 400 रुपये क्विंटल की मांग करते रहे हैं, लेकिन सत्ता में आते ही उन्हें किसानों के बजाय मिल मालिक अच्छे लगने लगती है।
चीनी मिलों के दबाव में सरकार ने नहीं बढ़ाया गन्ना मूल्य
योगी सरकार ने 50 लाख किसानों की मांग को दरकिनार करते हुए इस वर्ष गन्ना मूल्य में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की है। सरकार के इस निर्णय से जिले में गन्ना किसानों में भाजपा के प्रति नाराजगी और बढ़ गई है। सरकार के इस निर्णय से भाजपा सरकार का किसान विरोधी चेहरा और उजागर हुआ है। डीजल, यूरिया, पोटाश, डीएपी कीटनाशकों व बिजली के मूल्यों में वृद्धि केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने की है, मगर सरकार ने गन्ना मूल्य तय करते हुए उसका संज्ञान नहीं लिया है। सरकार के इस निर्णय से स्पष्ट है कि भाजपा सरकार मिल मालिकों के हितों के लिए उनके दबाव में काम कर रही है। किसानों के हितों की कोई चिंता नहीं है। केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने इस साल सिंचाई के काम आने वाले डीजल एवं बिजली के मूल्यों में क्रमश: 28 प्रतिशत एवं 32 प्रतिशत डीएपी एवं पेस्टीसाइड में 10 प्रतिशत से 30 प्रतिशत की वृद्धि की है। मजदूरी भी 10-20 प्रतिशत महंगी हुई है। सरकार के गन्ना शोध केंद्र ,शाहजहांपुर के अनुसार भी इस वर्ष गन्ने का लागत मूल्य आठ रुपये बढ़कर 297 रुपये क्विंटल हो गया है। सरकारी हिसाब से ही इस वर्ष गन्ना किसानों को प्रति क्विंटल आठ रुपये का नुकसान होगा। गन्ना मूल्य न बढ़ाने से किसानों की आर्थिक स्थिति और खाब होगी। किसान नेता प्रोफेेसर सुधीर पंवार, सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता।
किसानों के साथ मजाक किया
लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए किसान उम्मीद लगाए बैठे कि महंगाई को देखते हुए गन्ना मूल्य बढ़ाया जाएगा। बिजली, खाद, डीजल- पेट्रोल आदि के रेट बढ़ने के साथ-साथ गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे। गन्ना मूल्य न बढ़ाकर प्रदेश सरकार ने किसानों के साथ मजाक किया है। किसान 2019 के लोकसभा चुनाव में सरकार से बदला लेंगे। चौधरी नरेश टिकैत, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन।
प्रदेश सरकार किसान विरोधी
केंद्र और प्रदेश की सरकार किसान की बात न करके अपना रैवया विरोधी साबित कर रही है। वह गन्ना मूल्य न बढ़ाकर चाहती है कि किसान के हाथ में कटोरा आ जाए। सरकार फसलों के वाजिब दाम का सर्वे करा बताए क्या यह वाजिब दाम है। पंकज मलिक, पूर्व विधायक कांग्रेस, शामली
सरकार ने 440 वोल्ट का झटका दिया
पिछले साल का गन्ना पेराई सत्र का किसानों का चीनी मिलों पर करोड़ रुपये बकाया है। किसानों का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं हुआ है। चुनावी साल में गन्ना मूल्य न बढ़ाकर किसानों को 440 वोल्ट का झटका सरकार ने दिया है। क्या ऐसे ही किसानों की आय दुगनी होगी। - राव अब्दुल वारिस, पूर्व विधायक थानाभवन विधानसभा।
किसानों को बर्बाद करने की साजिश
किसानों को बर्बाद करने के लिए सरकार ने गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया है। यूरिया, खाद, बिजली और मजदूरी बढ़ने से किसानों का गन्ना मूल्य की उम्मीद थी। बाबा सूरजमल, भैसवाल।