साहित्यिक संस्था ‘कारवां’ की ओर से मंगलवार रात काव्य संध्या एवं शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जनपद के विभिन्न विद्यालयों में उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने वाले शिक्षकों व कवियों को सम्मानित किया गया।
शामली नगर पालिका परिषद के सभागार में आयोजित काव्य संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि रजनीश नामदेव तथा विशिष्ट अतिथि विजय सिंह पथिक डिग्री कॉलेज कैराना के प्राचार्य डाक्टर चमन लाल ने संयुक्त रूप से किया। शायर प्रदीप ‘मायूस’ ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए सुनाया, भोली भाली सूरत के कुछ पहलू भी हो सकते हैं, उनकी आंखों में कुछ काले जादू भी हो सकते हैं, इन मासूमों के हाथों में कलम सौंप दो जल्दी से, वरना इनके हाथों में कल चाकू भी हो सकते हैं।
कवि प्रीतम सिंह ‘प्रीतम’ ने सुनाया- भारत माता का श्रृंगार हिंदी है, भारतीयता का उद्गार हिंदी है। शायर जमशेद राणा ने सुनाया- मुफलिस पे बेकसों पे नजर क्यूं नहीं जाती, गुरबत में छोड़ हमको उधर क्यूं नहीं जाती। कवि अनिल पोपट ने हास्य रचना सुनाई- हलवा खिला दूं अपना बजट बिगाड़ दूं, जी में आता है जिंदा ही गाड़ दूं। इनके अलावा डाक्टर अनुराग शर्मा, वसीम झिंझानवी, इमरान झिंझानवी, अय्यूब, ताहिर, प्रमोद कुमार और राजीव झाल ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में यशपाल पंवार, प्राचार्या वेद कुमारी, डाक्टर चमनलाल, एसके आर्य, प्रवीण कुमार, मीना कुमारी, बलजीत कौर, शिवानी अरोरा समेत करीब 50 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरदार राजेंद्रपाल सिंह और संचालन डाक्टर अनुराग शर्मा ने किया। इस दौरान विजय पाठक, वासु भंवरा, देवेंद्र धींगान, देवेंद्र बिडला, राकुमार, प्रवीण कुमार आदि मौजूद रहे।