रात के सन्नाटे को चीर रही थी घायलों की चीख
शामली। शुक्रवार अलसुबह करीब साढ़े चार बजे हुए हादसे के बाद दो ट्रकों के बीच कैंटर में 30 जिंदगियां फंसी थी। कैंटर में फंसे लोगों ने मौत को बेहद नजदीक से गुजरते देखा। उनकी चीख रात के सन्नाटे को चीर रही थी।
कैंटर में सवार संतोष आदि महिलाओं ने बताया कि रात को अधिकतर लोग कैंटर में सो रहे थे। महिलाएं बच्चों को कंबल ओढ़ाकर बैठी थी। अचानक तेज आवाज हुई और वे सभी लोग सहम गए। आगे की ओर बैठे लोगों के सिर और चेहरे कैंटर की बॉडी पर जाकर लगे। वे कुछ समझते तभी कैंटर में पीछे से आए ट्रक ने टक्कर मारी। वे लोग कैंटर में ही लोहेे की बॉडी पर जाकर लगे। बच्चों के मुंह, सिर से खून आने लगे। कुछ की हाथ पैर में गहरी चोट आई। उन पर खड़ा भी नहीं हुआ जा जा रहा था। आगे और पीछे दोनों तरफ से ट्रक के बीच वे लोग फंसे थे और चीख रहे थे। बच्चे जोर से चिल्ला रहे थे। वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने अपने वाहन रोके। कुछ देर बाद पुलिस वहां पहुंची और किसी तरह उन्हें बाहर निकलवाकर अस्पताल भेजा। पुलिस पहले गंभीर घायलों को ले गई। बाद में कम घायल या चोटिल लोगों को ही उपचार को ले गई थी। कुछ घायलों ने बताया कि दुर्घटना के बाद आसपास केे कोल्हू पर रहने वाले लोग दौड़कर उनकी मदद को आए। कुछ को बाहर भी निकाला। संभवत: उनमें से ही किसी ने पुलिस को सूचना दी थी।
किसी दिन बड़ा हादसा करा सकता है काबड़ौत पुल
शामली। काबड़ौत पुल अभी केवल सिंगल लेन पुल है। इसे फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल चुकी है। मार्च में इसकी स्वीकृति हो गई थी। बजट आने के बाद काम भी शुरू हो गया है। छह महीने से काम चल रहा है, करीब एक साल में इसे पूरा होने की बात कही जा रही है, लेकिन इस पुल पर लगने वाला जाम ही हादसों की वजह है। दरअसल, पानीपत करनाल रोड बनने के बाद इस रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ा है, लेेकिन सिंगल लेन होने की वजह से यहां अधिकतर जाम लगा रहा है। पुल के दोनों तरफ वाहनों की कतारें लगी रहती है और अक्सर हादसे भी होते हैं। बृहस्पतिवार को खुद भाजपा विधायक तजेंद्र निर्वाल भी यहां जाम में फंस गए थे।