- तीनों दलों की संयुक्त बैठक में होगा अंतिम फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच तमाम राजनीतिक दलों में सरगर्मी तेज हो गई है। सपा-रालोद-आसपा गठबंधन के बीच अभी सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन चल रहा है। रालोद ने 6, सपा ने 4 और आसपा ने दो सीटों पर दावेदारी जताई है। गठबंधन की छह अप्रैल को होने वाली बैठक में सीटों के बंटवारे की तस्वीर साफ होगी।
विधानसभा चुनाव में जिले में गठबंधन में रालाेद को तीन में से दो सीटें मिली थी। सदर सीट पर प्रसन्न चौधरी ने भाजपा के तेजेंद्र निर्वाल को और थानाभवन सीट पर अशरफ अली खान ने तत्कालीन गन्ना मंत्री सुरेश राणा को मात दी थी। कैराना में नाहिद हसन ने जेल में रहते हुए भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को रिकॉर्ड मतों से हराया था। अब निकाय चुनाव में दोनों दलों के बीच फिर से सीटों का बंटवारा होना है। रालोद के स्थानीय निकाय चुनाव के पर्यवेक्षक अब्दुल राव वारिस ने बताया कि निकाय चुनाव को लेकर पार्टी की सहारनपुर मंडल की बैठक सोमवार को मुजफ्फरनगर में होगी। मेरठ मंडल की बैठक मेरठ में मंगलवार को होगी। गठबंधन की बैठक छह अप्रैल को होगी। जिसमें सीटों के बंटवारे पर मुहर लगेगी।
रालोद का इन सीटों पर है दावा
शामली, जलालाबाद, गढ़ीपुख्ता, ऊन, बनत और कांधला।
सपा की इन सीटों पर दावेदारी
कैराना, झिंझाना, एलम और थानाभवन।
आसपा ने मांगी ये सीट
थानाभवन और बनत ।
पहले प्रत्याशी फिर सिंबल होगा तय
सपा-रालोद-आसपा गंठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अलग तरीका भी अपनाया जा सकता है। तीनों दल मिलकर जिताऊ प्रत्याशी तय करेंगे, उसके बाद तय किया जाएगा कि प्रत्याशी को किस सिंबल पर चुनाव लड़ाया जाएगा।
दोनों दलों के नेताओं में संपर्क में कुछ दोवदार
सपा और रालोद के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के नेता भी असमंजस में हैं। अभी यह तय नहीं हुआ कि कौन सी सीट किस दल के खाते में जाएगी। ऐसे में कुछ नेता दोनों दलों के नेताओं के संपर्क में हैं। वह सिंबल बदलकर भी चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं।
आरक्षण की घोषणा होते ही टिकट पाने की जुगत में जुटे दावेदार
ऊन। नगर निकाय चुनाव के आरक्षण की घोषणा होते ही चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। सभी दलों में टिकट के लिए दावेदारों ने अपनी भागदौड़ शुरु कर दी है। टिकट के दावेदारों में सबसे लंबी लाइन भाजपा में हैं। नगर पंचायत के टिकट लेने के लिए राजनीतिक धुरंधरों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना है। अध्यक्ष पद के लिए सबसे ज्यादा कयास अनारक्षित सीट के लगाए जा रहे थे, जो सही साबित हुआ। अनारक्षित सीट पर सभी जातियों के प्रत्याशियों को जोर आजमाइश का मौका मिलेगा।
पिछली बार यह सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। भाजपा से जुड़े दावेदार इन दिनों पार्टी के बड़े नेताओं के संपर्क साध रहे हैं और अपना टिकट होने का दावा कर रहे हैं। बसपा के लिए भी कई दावेदार हैं। सपा और रालोद में दावेदार तो कई है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि पार्टी जीतने वाले चेहरे पर ही दांव लगाएगी। भाजपा के टिकट के लिए सभी जातियों के प्रत्याशी अपनी जातीय समीकरण बताकर टिकट की मांग कर रहे हैं। दावेदारों की भीड़ में से भाजपा को प्रत्याशी चुनने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।