उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में करीब दो साल पुराने बहुचर्चित शाहिस्ता परवीन मर्डर केस में अदालत ने शाहिस्ता के भाई मोहम्मद इमरान को दोष सिद्ध करते हुए उसे उम्रकैद और बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है।
इमरान ने अपनी सगी बहन शाहिस्ता का गला मांस काटने वाले छुरे से काट डाला था। बीए की इस छात्रा का कसूर बस इतना था कि वो अपने ही मोहल्ले के दूसरी जाति के युवक से प्यार करती थी और उससे शादी करना चाहती थी।
ठाकुरद्वारा कस्बे के मोहल्ला ईदगाह रोड पर आनर किलिंग की ये सनसनीखेज वारदात नौ फरवरी 2011 को रात करीब साढ़े नौ बजे हुई थी। उस्मान अली ने ठाकुरद्वारा थाने में अपने सगे बेटे मोहम्मद इमरान के खिलाफ अपनी बेटी शाहिस्ता की हत्या का केस दर्ज कराया था।
एफआईआर में उस्मान ने कहा था कि उसकी बेटी शाहिस्ता बीए की छात्रा थी और कंप्यूटर सीखने कस्बे में जाती थी, वहां उसकी मुलाकातें मोहल्ले के ही हनीफ से शुरू हो गईं।
जब इमरान ने बहन को टोका तो वो नहीं मानी और हनीफ से शादी की जिद पर अड़ गई। शाहिस्ता मंसूरी थी जबकि हनीफ धोबी बिरादरी का था लिहाजा इमरान को ये रिश्ता मंजूर नहीं था।
जब शाहिस्ता ने उससे मिलना जुलना बंद नहीं किया तो बदनामी से बचने के लिए इमरान ने अपनी बहन शाहिस्ता का गला मांस काटने वाले छुरे से काट डाला। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई। केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश - 12 महफूज अली की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष एडीजीसी आरएस राठौर ने रखा।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त इमरान को शाहिस्ता की हत्या का दोषी माना और उसे आजीवन कारावास व बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।