गांधी भवन में नाटक का मंचन करते कलाकार। संवाद
शाहजहांपुर। अभिव्यक्ति नाट्य मंच की ओर से रविवार को गांधी भवन सभागार में ‘जरूरत है श्रीमती की’ नाटक का मंचन किया गया। हास्य और मनोरंजन से भरपूर नाटक ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कलाकारों ने प्रेम, धन, लालच और हास्यपूर्ण परिस्थितियों के माध्यम से संदेश दिया कि रिश्ते संपत्ति से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और सच्चाई से मजबूत होते हैं।
राजकुमार अनिल लिखित नाटक में दिखाया गया कि सेठ अपनी बेटी मंदा का विवाह प्रतिष्ठित व्यापारी दीनानाथ के बेटे मलय से कराना चाहते हैं। वहीं मंदा अपने प्रेमी मुकेश को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। दोनों के बीच गरीबी और अमीरी की दीवार खड़ी है। कहानी में आए हास्यपूर्ण प्रसंगों ने दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
वरिष्ठ रंगकर्मी शमीम आजाद के निर्देशन में कलाकारों ने प्रभावी अभिनय किया। जय सिंह ने रामजी, खालिद हसन ने हरिदास सेठ, विशाल पाल ने मुकेश चंद्र चित्रकार और आरव ने कवि की भूमिका निभाई। मंचन की व्यवस्थाओं में संजय राठौर, अरविंद चोला, अनिल राठौर, परविंदर सिंह, सुनील राठौर आदि का सहयोग रहा। संवाद