शाहजहांपुर। हर साल 14 से 20 नवंबर तक राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह मनाया जाता है। शहर के हनुमतधाम पर स्थित विवेकानंद पुस्तकालय में रोजाना सैकड़ों युवा आकर पुस्तकें पढ़ते हैं। कई युवाओं ने यहां पर पुस्तकों को पढ़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की है। कुछ ने अपना कॅरिअर भी बनाया है।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयासों से हनुमतधाम पर विवेकानंद पुस्तकालय की स्थापना साल 2004 में हुई थी। तब से ही इस पुस्तकालय का युवाओं को फायदा भी मिल रहा है। विवेकानंद पुस्तकालय में विभिन्न प्रकार की किताबें रखी गई हैं। यहां आकर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का कहना है कि पुस्तकालय में पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिलने से पढ़ाई हो पा रही है। पुस्तकालय के नियमों के मुताबिक यहां पढ़ाई करने के लिए पंजीकरण करना जरूरी है। जिसके लिए एक सामान्य शुल्क निर्धारित है।
अब डिजिटल लाइब्रेरी की दरकार
विवेकानंद पुस्तकालय में अभी डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा नहीं है। युवाओं का कहना है कि यदि डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मिल जाए, तो उन्हें सभी तरह की पुस्तकें उपलब्ध हो जाएगी। हालांकि वर्तमान में करीब 22 हजार पुस्तकें पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
शिक्षा ही नहीं मनोरंजन की य
पुस्तकालय में हिंदी, उर्दू, के साथ ही बाल, यौन और विदेशी साहित्य की पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। इनके अलावा विज्ञान, गणित, कंप्यूटर साइंस, आयुर्वेद, एनसीईआरटी की पुस्तकों को भी यहां पढ़ा जा सकता है। नाटक, उपान्यास, कहानी, समालेखन, आत्मकथाएं भी उपलब्ध हैं।
युवाओं में होता है तर्क-वितर्क
- पुस्तकालय परिसर का नजारा बिल्कुल अलग रहता है। युवाओं का समूह अलग-अलग स्थानों पर विषयों के संबंध में तर्क-वितर्क करते रहते हैं। साथ ही आपस में एक-दूसरे की मदद भी करते रहते हैं। इससे पढ़ा हुआ आसानी से समझा जा सकता है।
मूल संविधान के हिंदी संस्करण की प्रतिलिपि भी उपलब्ध
- विवेकानंद पुस्तकालय में चार साल में रचे और गढ़े गए मूल संविधान के हिंदी संस्करण की मूल प्रतिलिपि से लोकसभा सचिवालय ने सन् 1999 में जो 1200 ऑफसेट मुद्रित प्रतिलिपियां तैयार की थीं, उनमें से एक प्रति यहां भी उपलब्ध है। ऑफसेट मुद्रित प्रति पर गोल्डन प्रिंट किया गया है।
पुस्तकें पढ़ने से होता सर्वांगीण विकास : शिवानी
पुस्तकालय अध्यक्ष शिवानी अरोरा बताती हैं कि हनुमत धाम प्रबंध समिति के द्वारा पुस्तकालय का संचालन किया जाता है। जिसके अध्यक्ष विनोद अग्रवाल, निदेशक एनसी मेहरोत्रा, सहायक केशव चंद्र मिश्रा है। 10 आजीवन सदस्यों की संख्या 92, वार्षिक की 1000 के करीब है।