निगोही। गांगेपरा गांव में दस दिन पहले बंदरों के दौड़ाने के दौरान छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुईं हरिश्चंद्र की पत्नी नीलम (38) की बरेली के एक अस्पताल में शुक्रवार को देर रात उपचार के दौरान मौत हो गई।
नीलम 20 अगस्त की शाम करीब पांच बजे किसी काम से घर की छत पर गई थीं। इसी दौरान वहां पहुंचे बंदरों के झुंड को उन्होंने भगाने का प्रयास किया। इस पर बंदरों ने उन्हें दौड़ा लिया। बंदरों से बचने के लिए भागी नीलम छत से घर के बाहर पक्की सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं।
परिजन उन्हे सीएचसी लेकर आए। वहां से राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर नीलम को उनके परिजन शुक्रवार की शाम बरेली के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां रात करीब 12 बजे नीलम की मौत हो गई।
नीलम की मौत से उनके पति के अलावा पुत्री लक्ष्मी, पुत्र सचिन, पिंटू और शिवम का रो-रोकर बुरा हाल है। गांगेपरा के ग्राम प्रधान मुकेश के अनुसार गांव में इस समय करीब 1500 बंदर हैं, जो लोगों को काट कर घायल कर रहे हैं और फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
पंचायत सचिव से कई बार कहने पर भी बंदर नहीं पकड़े गए। एसडीएम सदर/नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि कर्मचारियों से बात कर बंदरों को जल्द पकड़वाया जाएगा।
सीएचसी पर रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे 20 से ज्यादा लोग
गांगेपुरा समेत क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बंदरों के हमले बढ़ जाने से ग्रामीण परेशान हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. नितिन चौधरी के अनुसार रोजाना करीब 20 से अधिक लोग बंदरों के काटने पर अस्पताल पहुंच रहे हैं। करीब एक वर्ष पूर्व कस्बा निवासी गुल्ले की बंदरों के दौड़ाने पर छत से गिरकर तो दो वर्ष पहले डेलखेड़ा गांव में बुजुर्ग अयूब खां की भी इसी तरह छत से गिरकर मौत हो चुकी है। कस्बे के मोहल्ला नई बस्ती निवासी हमीदा खां, कल्लू खां, रशीद खां, इजहार खां आदि भी बंदरों के काटने से घायल हो चुके हैं। कुदिरना, कजरी नूरपुर, अरेली, इस्माइलपुर, गुरगवां, पराझरसा, संडाखास, आदि गांवों में भी बंदरों की दहशत में महिलाओं और बच्चों ने छतों पर जाना छोड़ दिया है।