ब्लाक की ग्राम पंचायत दोषपुर थोक आज भी विकास की मोहताज है। गांव की गलियों में न तो खड़ंजा-नाली है और न ही स्वच्छ शौचालय। तीस वर्ष पहले इस गांव में बिजलीकरण किया गया था, किंतु बिजली एक भी दिन नहीं आई। ग्राम प्रधान सोनेलाल के निधन के बाद ग्राम पंचायत द्वारा करवाए जाने वाले विकास कार्यों की भी जवाब देही खत्म हो गई है।
लगभग साढ़े तीन हजार की आबादी वाली इस ग्राम पंचायत में ग्राम थोक व रामदयाल नगला दो मजरे हैं। सोत नदी के किनारे बसी इस ग्राम पंचायत को केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत 250 शौचालयों का आवंटन हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार गांव में एक भी शौचालय पूर्ण नहीं है। गांव की मुख्य गली जो पप्पू पांडेय के घर से राजनारायण के घर तक जाती है इसमें कीचड़ की बजह से निकलना मुश्किल है। इस पर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
गांव में खंभों पर बिजली की लाइन झूल रही है, किंतु करंट 30 वर्ष से नहीं आया है। गांव के बड़ेलल्ला व कमलेश कहते हैं कि बिजली के झूलते तारों को काट कर लोगों ने घरों में कपड़े सुखाने के लिए बांध रखा है। गांव के पूर्व और दक्षिण में दो सरकारी नलकूप सिंचाई के लिए बूनवाए गए थे। बिजली के बिना नलकूप बनने के बाद से ही बंद पड़े हैं।
गांव दोषपुर के ख्यालू, केशू, उर्मील, राजनारायण अग्निहोत्री, सफी मोहम्मद, कैलाशनारायण आदि ने बताया कि केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस ग्राम पंचायत को 250 स्वच्छ शौचालय आवंटित हुए थे, इनमें एक भी शौचालय पूर्ण नहीं है। ग्राम प्रधान सोनेलाल का एक माह पूर्व निधन हो गया था। तब से मानों गांव में कागजों पर करवाये गये विकास कार्यों की जवाब देही भी खत्म हो गई है। हालांकि ग्रामीण कई बार तहसील और ब्लाक मुख्यालय पर गांव में विकास करवाए जाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, किंतु आश्वासनों के सिवाय आज तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।