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बिना पुस्तकों के होगी नए सत्र की शुरूआत

Sun, 29 Mar 2015 10:47 PM IST
शाहजहांपुर
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परिषदीय स्कूलों के बच्चे सत्र की शुरुआत में बगैर पुस्तकों के पढे़ंगे, क्योंकि अप्रैल में नई पुस्तकें आ नहीं सकेंगीं। वहीं बच्चों की रखीं पुरानी पुस्तकें प्रयोग लायक नहीं बची हैं। इससे सत्र की शुरुआत में बच्चों को बगैर पुस्तकों के ही पढ़ना पड़ेगा।
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सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर एक अप्रैल से परिषदीय स्कूलों में भी शिक्षण कार्य शुरू हो रहा है, लेकिन कम समय मिलने की वजह से विद्यालयों में नि:शुल्क वितरित होने वाली पुस्तकें नहीं पहुंची सकेंगी। इस वजह से अप्रैल माह में बच्चों को बगैर पुस्तकों के ही पढ़ना होगा। हालांकि शासन से स्पष्ट रूप से दिशानिर्देश दिए जा चुके हैं कि जिन विद्यालय में शिक्षणरत बच्चों की पुस्तकों को जमा कर लिया जाए। उन पुस्तकों को ही दूसरे बच्चों में वितरण कर दिया जाए, लेकिन यह निर्देश धरातल पर कहीं टिकता नजर नहीं आ रहा।
जिले में 2292 प्राथमिक और 897 प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में अध्ययनरत अधिकांश छात्र-छात्राओं की पुस्तकें फट चुकी हैं। वे इस लायक नहीं हैं कि उन्हें दोबारा प्रयोग में लाया जा सके। निर्देशों के बावजूद अभी तक अधिकांश विद्यालयों में पुस्तकें अभी तक बच्चों से एकत्रित नहीं की जा सकी हैं। शिक्षक एक अप्रैल के बाद से पुस्तकें एकत्रित करने के विचार में हैं।
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शिक्षा का अंतिम विकल्प नहीं पुस्तकें: रामसेवक
परिषदीय विद्यालय कुरसंडा के शिक्षक एवं जिला संदर्भदाता विज्ञान एवं गणित रामसेवक शर्मा का कहना है कि पुस्तकें शिक्षा का अंतिम विकल्प नहीं हो सकतीं। उनका कहना है कि शिक्षक बच्चों को पुनरावृत्ति के अंतर्गत भाषा का पठन पाठन, सुलेख, श्रतुलेख, गणितीय संक्रियाओं का प्रारंभिक ज्ञान, परिवेशीय ज्ञान एवं अन्य विषयों की अध्ययन बगैर पुस्तकों के भी करा सकता है। कहा कि शिक्षक पुस्तकें मिलने का इंतजार न करें, बल्कि सत्र प्रारंभ होते ही प्रशिक्षण में बताई गईं विधियों के अनुसार बच्चों को शिक्षित करना शुरू कर दें। इससे शिक्षा का सतर भी सुधरेगा साथ ही छात्र-छात्राओं को पुस्तकें आने पर उनका अध्ययन करने में आसानी रहेगी।

‘सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि छात्र-छात्राओं से किताबें जमा कर लें। इन्हीें किताबों को बच्चों को एक अप्रैल से वितरित किया जाना है। साथ ही वर्ष 2014-15 में जो किताबें शेष रह गईं थीं उन्हें बांटने के भी निर्देश दिए जा चुके हैं।’
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- राजेश वर्मा, बीएसए
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