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शिकारी के घायल होने के मामले में वन विभाग की लीपापोती

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खुटार। फंदे में फंसे बाघ को निकालने के दौरान एक युवक के घायल होने के मामले में सही जांच के स्थान पर वन विभाग लीपापोती में जुट गया है। युवक की तलाश करने की जरूरत नहीं समझी गई है। प्रधान से यह लिखवा कर कि इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है, मामले को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
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शुक्रवार रात गांव जसवंत नगर के कुछ शिकारियों ने खुटार रेंज के गांव छापा बोझी के मजरा कुरैया वीरान के जंगल में शिकार करने के लिए खाबर (एक प्रकार का बड़ा कांटा, जिसमें पशु का पैर फंस जाता है) जाल, फंदा आदि लगा रखा था। चर्चा है कि रात में एक बाघ जाल में फंस गया, शिकारियों ने अंधेरे में जब उसे पकड़ने की कोशिश की तो बाघ ने एक युवक के पंजा मारकर घायल कर दिया था। इस बीच बाघ फंदे से निकलकर जंगल की ओर चला गया। परिवार वाले घायल का निजी डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं और युवक को कहीं बाहर ही रखा जा रहा है।
इस मामले में शनिवार को रेंजर डीएस यादव ने कहा था कि रविवार को जांच कर कार्रवाई की जाएगी। रविवार को रेंजर ने मौके पर जाने की जरूरत नहीं समझी। वन दरोगा एनबी पांडे को गांव भेजा गया। वन दरोगा कुछ लोगों से यह लिखवाकर वापस चले गए कि इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है।
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बड़ा सवाल है कि जब जंगल में कोई घायल नहीं हुआ है तो वहां पत्तों पर खून कैसे पड़ा था? जिस युवक के घायल होने की बात चर्चा में है, परिवार के लोग शनिवार को उसके मजदूरी पर जाने की बात कह रहे थे और रविवार को रिश्तेदारी में जाने की बात कह रहे हैं, आखिर युवक सामने क्यों नहीं आ रहा है? युवक रिश्तेदारी में कहां गया है, इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारी क्यों नही करा रहे हैं? दरोगा एनबी पांडे ने बताया कि जो पगचिह्न मिले हैं, वह बाघ के नही लगते हैं। पग चिह्न किस पशु के हैं, यह क्यों नहीं बताया जा रहा है।
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बाघ की जान को हो सकता था खतरा
बाघ के फंदे में फंसने के बाद उसे निकालते समय युवक के घायल होने के मामले में बाघ की जान को बड़ा खतरा हो सकता था।
बाघ के हमले में घायल युवक और उसके साथी शोर शराबा करते तो गांव के लोग मौके पर आ सकते थे। ऐसे में लोग बाघ पर हमला कर सकते थे। इधर, गांव जसवंतनगर के लोग भी युवक के घायल होने के मामले में चुप्पी साधे हैं और कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। मीडिया को देखते ही लोग खिसक लेते हैं और बुलाने पर जरूरी काम से जाने की बात कहकर चले जाते हैं।
एक युवक बमुश्किल बात करने को तैयार हुआ तो उसने बताया कि गांव के तमाम लोग रोजाना जंगल से लकड़ी, सब्जी, घास आदि लेने जाते हैं। ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कुछ भी कहने पर वनकर्मी केस काटने की कार्रवाई कर देंगे।
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कई बड़े मामलों में पहले भी होती रही है लीपापोती
खुटार। खुटार रेंज के जंगल लखीमपुर के जंगलों से सटे हुए हैं और यह नेपाल के जंगलों तक सीधे जुड़े हैं। बेशकीमती सागौन और साखू की लकड़ी के लिए मशहूर खुटार के जंगलों में वन्य पशुओं की बहुतायत के कारण शिकारियों की यहां ज्यादा दिलचस्पी रहती है। इस कारण कई बार बड़े मामले सामने आए, जिनको दबाने की भरपूर प्रयास भी किया गया।
18 जनवरी 2019 को गांव लुकटहा के रोशन लाल ने पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों को जानकारी दी थी कि गांव के कुछ शिकारियों ने एक गुलदार का शिकार किया है। इससे वन विभाग में खलबली मच गई थी। रोशनलाल ने वन्य पशु के अवशेष भी वन विभाग के अधिकारियों को दिखाए थे, जिनको बाद में कैट फिश के अवशेष बताकर मामले को हलका कर लीपापोती कर दी गई थी। इस वर्ष फरवरी में खुटार रेंज की बिलंदापुर बीट में सागौन की लकड़ी से भरी पिकअप पकड़े जाने के मामले में भी लीपापोती कर दी गई।
खुटार रेंज के छापाबोझी जंगल में मार्च में तीन दिन तक आग लगी रही, लेकिन वन विभाग के अधिकारी पत्तों के जलने की ही बात कहते रहे। जंगल में तमाम नए पौधे और बड़े पेड़ भी जल गए, इसके बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी गई। फायर ब्रिगेड टीम और पुलिसकर्मियों ने आग बुझाई थी, लेकिन वनकर्मी मौका मुआयना कर खिसक लिए थे।
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समूह में खेत पर जा रहे हैं किसान
खुटार। बाघ के हमले में युवक के घायल होने के बाद जंगल के आसपास खेतों में किसान समूह में काम करने जा रहे हैं। किसानों ने बताया कि घटना के बारे में खूब चर्चा है, लेकिन सत्यता की जानकारी उनको नहीं है। फिर भी वह लोग सावधानीवश समूह में खेत पर जा रहे हैं।
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गांव के प्रधान और अन्य लोगों से लिखवाकर लिया गया है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। युवक रिश्तेदारी में गया है। रिश्तेदारी में कहां गया है इसकी जानकारी नहीं है।
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- डीएस यादव, रेंजर खुटार रेंज
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