22 सितंबर 2014 को गांव जिगनेरा के बाहर तालाब में करीब 30 वर्षीय एक युवक का शव मिला था। शिनाख्त न होने पर पुलिस ने गांव के प्रधान के पति अलवर सिंह की तरफ से मुकदमा दर्ज कर शव को मॉरचरी में रखवा दिया था। अखबारों में इस बाबत खबर छपने के अगले दिन अल्हागंज क्षेत्र के गांव रघुनाथुपर निवासी प्रदीप मिश्र कोतवाली आये और अपने भाई संदीप मिश्रा के गायब होने की बात बताते हुए मॉरचरी में रखे शव की शिनाख्त अपने भाई संदीप के रूप में की। आरोप लगाया कि बुआ का बेटा विनय काम के बहाने संदीप को हरिद्वार ले गया और उसके साथ मारपीट की। जानकारी होने पर संदीप की मां ने उसे लौट आने को कहा। 27 अगस्त 2014 को हरिद्वार में बस में बैठने के बाद संदीप ने फोन किया लेकिन मुरादाबाद के बाद उसके लोकेशन मिलनी बंद हो गई। भाई प्रदीप ने मिर्जापुर क्षेत्र के गांव वानगांव निवासी अपने विनय अवस्थी, सुधीर, अंकित, योगेश अवस्थी और हरदोई निवासी मोनू के खिलाफ अपहरण के बाद हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में पांचों गिरफ्तार भी किए गए थे, वे इस वक्त जमानत पर हैं। अब मामला खुलने के बाद उनके खिलाफ लगे मुकदमे को खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं झूठा मुकदमा लिखाने के आरोप में भाई प्रदीप मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई संभावित मानी जा रही है।