शाहजहांपुर में रमजान के लिए सिंवई की खरीदारी करते लोग। संवाद
शाहजहांपुर। रहमतों और बरकतों का माह-ए-रमजान के लिए अभी एक दिन और इंतजार करना पड़ेगा। बुधवार शाम चांद न दिखने से लोगों को मायूसी हाथ लगी। चांद का दीदार न होने के कारण अब शुक्रवार को पहला रोजा होगा। तरावीह की नमाज बृहस्पतिवार शाम मस्जिदों में पढ़ाई जाएगी।
रमजान के महीने का काफी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। बुधवार को पूरे दिन लोगों ने बाजार में रोजा रखने के लिए जरूरत का सामान खरीदा। शाम में मगरिब की नमाज के बाद लोग चांद का दीदार करने के लिए छत पर चढ़ गए, लेकिन चांद नजर नहीं आया। इसके चलते शुक्रवार को पहला रोजा होगा।
शहर काजी सैयद सैफ ने बताया कि बुधवार को चांद न दिखने के कारण पहला रोजा शुक्रवार को होगा। उन्होंने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम जब मक्का से मदीना तशरीफ लाए तो डेढ़ साल के बाद सन 02 हिजरी में एक महीने के रोजे फर्ज हुए। इससे पहले लोग नफिल रोजा रखते थे। रमजान संयम और खुदा की इबादत का महीना है। रमजान में की गई इबादत बहुत असरदार होती है। इसमें खानपान का संयम होता है और गलतियों को सुधारने का मौका मिलता है। रोजा रखना सभी पर फर्ज है। इस माह में जकात देने से माल-कारोबार में बरकत होती है।