तिलहर। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था तहजीब-ए-तिलहर की ओर से रविवार की रात सेवानिवृत्त आईपीएस शिव मुरारी सहाय के मोहल्ला हिन्दू पट्टी स्थित आवास पर 25वां सालाना कवि सम्मेलन व मुशायरा आयोजित किया गया। होली मिलन के मौके पर कवियों और शायरों ने रचनाएं पेश कीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गाजियाबाद से आए वरिष्ठ कवि गोविंद गुलशन ने की और संचालन मशहूर संचालक नदीम फर्रुख ने किया। देर रात तक चले कवि सम्मेलन व मुशायरे में कवियों और शायरों ने समसामयिक कविताएं और नज्में सुनाईं।
दिल्ली से आए शायर दीक्षित दनकौरी ने सुनाया-इतनी नफरत यार कहां से लाते हो, लफ्जों में अंगार कहां से लाते हो। नदीम फर्रुख ने फरमाया-मुझको इंसान ही रहने दे फरिश्ता न बना, इतनी तारीफ भी मत कर कि मैं पत्थर हो जाऊं। भोपाल से आईं कवयित्री अनु सपन ने गुनगुनाया -जिंदा रहना है तो जिंदगी से लड़ो, आसमां से नहीं रोटियां आएंगी। देवबंद से आए नदीम शाद ने कहा-लड़ें हैं आप अभी सामने के दुश्मन से, जो आस्तीन में हैं, उनसे कब लड़े हैं आप। आगरा से आए अनवर अमान ने गुनगुनाया -खुदा ने बख्शी है तुमको वो हुस्न की तनवीर, अंधेरी रात में निकलो तो रोशनी हो जाए। संभल से आए शायर अमीर इमाम ने सुनाया- इस तरह रंजो गम को सताता हुआ मिला, हंसता हुआ मिला वो हंसाता हुआ मिला।
इसी कड़ी में मेरठ से आए इकबाल अजहर, अहमदनगर महाराष्ट्र की शायरा क़मर सुरूर, मेरठ से आईं दानिश गजल, पुणे से आए विनीत शंकर ने सुनाया, आगरा से आए भरत दीप माथुर, शकील तिलहरी, शमशाद आतिफ आदि ने भी अपनी रचनाएं पढ़कर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में शिव मुरारी सहाय, गौरव सहाय, वीरेंद्र यादव, इकबाल हुसैन उर्फ फूल मियां आदि मौजूद रहे।