बेमौसम बारिश और आंधी से बर्बाद हुई गेहूं की फसल से किसानों की कमर तो पहले से ही टूट चुकी है। अब उसकी आखिरी उम्मीद गन्ना भुगतान पर टिकी है। गन्ना का भुगतान मिलने की बाट जोह रहे किसानोें के परिवारों में शादी-ब्याह तक रुक गए हैं। तमाम किसानों के घर नहीं बन पा रहे। बच्चों की स्कूल फीस के लिए तक किसान गन्ना भुगतान पर ही आश्रित होकर रह गए हैं।
किसानों की ऐसी स्थिति में मिल संचालकों ने भी भुगतान करने से मुंह फेर लिया है। दोतरफा मार से गन्ना किसान बेहाल है। बता दें कि जिले में संचालित हो रही पांच चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब 20053.88 लाख रुपये बकाया है। किसान मूलभूत जरूरतों को पूरा करने को भी परेशान हैं। तमाम किसानों ने सूदखोरों से ब्याज पर धनराशि ली। सूदखोर भी उन्हें मोटे ब्याज दर पर रुपये दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गन्ना मूल्यों के भुगतान की समीक्षा खुद करने के निर्णय के बाद जिला गन्ना अधिकारी और जिला के प्रशासनिक अधिकारियों ने भुगतान कराने को लेकर प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन इससे किसानों को अभी तक कोई खास लाभ नहीं मिल सका है। अधिकारियों ने मिलों की चीन सीज कर दी है, जिसे बेचकर किसानों को गन्ना मूल्यों का भुगतान किया जा सके।
हरदेव ने कर्ज लेकर विदा की बिटिया
शाहजहांपुर/बंडा। गन्ना किसान हरदेव सिंह ने मिल में गन्ना तोलने के बाद बेटी की शादी फरवरी में तय कर ली। मिल संचालकों ने गन्ना भुगतान नहीं किया तो हरदेव ने पांच लाख रुपये से अधिक कर्ज लेकर बिटिया की डोली विदा की।
बंडा क्षेत्र के गांव कुइंया महोलिया के किसान हरदेव सिंह ने 18 पर्चियों पर तीन लाख 42 हजार 124 रुपये का गन्ना मकसूदापुर की बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल को दिया था। इसमें मिल प्रशासन ने केवल पर्ची का 14517 रुपये का ही भुगतान किया है। हरदेव की बेटी रमनजीत कौर की शादी 14 फरवरी को थी जिसमें उसे पांच लाख से अधिक रुपये ब्याज लेने पड़ गए, जबकि मिल पर उनका करीब सवा पांच लाख रुपया बकाया है। वह मिल जाएगा तो उनका कर्जा निपट जाएगा।
बहन की शादी की तारीख नहीं कर पा रहे तय
तिलहर। क्षेत्र के गांव ग्राम ईश्वरा के वेदराम का कहना है कि उन्होंने आठ एकड़ खेत में गन्ने की फसल की थी। कहा कि सोचा था कि गन्ना बेचकर बहन की शादी वैशाख में कर दूंगा। इसी वजह से चीनी मिल में करीब 40 पर्ची गन्ना सप्लाई किया था। मिल संचालक बकाया मूल्यों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। बोले कि धनराशि न मिलने की वजह से शादी की तारीख तय नहीं कर पा रहा हूं। मिल पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये बकाया है। रुपये न मिलने से बच्चों की पढ़ाई का खर्च एवं कई अन्य जरूरी काम नहीं कर पा रहा हूं।
‘बकाया भुगतान का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत मकसूदापुर की बजाज चीनी मिल और रोजा चीनी मिल चीनी मिल की चीनी को प्रशासन ने कब्जे में ले लिया है। चीनी बेचकर गन्ना के बकाया मूल्यों का भुगतान किया जा रहा है। बजाज मिल में जो किसान धनराशि के बदले चीनी तो उसे दी जा रही है।’
- बीके पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
चीनी मिल गन्ना मूल्य बकाया
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रोजा 6038.09 रुपये
निगोही 2737.98 रुपये
मकसूदापुर 7232.59 रुपये
पुवायां 1774.47 रुपये
तिलहर 2070.75 रुपये
कुल 20053.88 रुपये
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नोट: उपरोक्त आंकड़े लाख में हैं।