फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेल में बंद बच्चे क्या बन सकेंगे ‘कृष्ण’ 

Mon, 14 Aug 2017 07:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
आज हम कृष्ण जन्माष्टमी मना रहे है। वे कृष्ण जिनका जन्म जेल की चहारदीवारी में हुआ था लेकिन उन्हें तो नंद बाबा जेल से बाहर निकाल लाए और यशोदा ने मां बनकर बेहतर परवरिश दी। युगों से कम उन्हें पूजते आ रहे है। लेकिन कुछ ऐसे भी बच्चे है जो न चाहते हुए भी वर्षों से अपने माता-पिता के कर्मों की सजा भुगत रहे है। यहां बात हो रही है जिला कारागार में बंद 10 बच्चों की जो अपनी मां के साथ सजा काट रहे है, जबकि एक अपने पिता के साथ है। अपराधियों के बीच में अपना बचपना गुजारने वाले इन ‘कृष्ण’ को बचाने कोई नंदबाबा नहीं आए। ऐसे में क्या जेल से बाहर निकलने के बाद ये मासूम एक बेहतर इंसान बन पाएंगे। हालांकि जेल प्रशासन तो यह दावा कर रहा है इन्हें जेल में ही बेहतर सुविधाएं दी जा रही है। खेलकूद से लेकर पढ़ाई तक की व्यवस्था बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। 
विज्ञापन

जिला कारागार की महिला बैरक में 72 महिलाओं में 10 महिलाएं ऐसी हैं, जिनके साथ इनके बच्चे भी रह रहे हैं। वहीं पुरुष बैरक में भी पिता के साथ एक बेगुनाह बच्चा भी सजा काट रहा है। जेल प्रशासन ने तीन बच्चों का डॉ. एमलाल मेमोरियल स्कूल में एडमिशन कराया हैं। इनमें महिला बंदी पावित्री का बेटा होशियार, मंजू की बेटी तान्या और पुरुष बंदी मुकेश का बेटा प्रशांत जेल से पढ़ने स्कूल पहुंचता है। इन बच्चों का एडमिशन केजी व नर्सरी में कराया गया है। इन बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के लिए जेल प्रशासन ने एक कर्मचारी को लगा रखा है। बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बन सकें इसके लिए जेल प्रशासन ने ट्यूशन के लिए भी दो महिला टीचर लगा रखीं हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि बच्चों को संस्कारी शिक्षा दिलाने के लिए वह प्रयासरत हैं लेकिन जिस बैरक में महिलाएं बंद हैं वहां रहकर बच्चे कैसे संस्कारी बनेंगे यह कहना मुश्किल है। 
00 
इनके साथ जेल में बीत रहा बचपन 
अनीता के साथ बेटी पंखुड़ी, जुलिस्ना के साथ उसके दो बच्चे अजीम, अजीज, अकिस्ना के साथ नाहज, जकिना के साथ इकरार, सुमन के साथ किरन, शशी के साथ अश्वनी, अनजरिया के साथ सुनजरिया, सोनी उर्फ रेशमा के साथ समीर, पावित्री के साथ होशियार, मंजू के साथ तान्य और मुकेश के साथ प्रशांत का बचपन जेल में बीत रहा है। यह सभी बच्चे छह वर्ष की कम उम्र के हैं।
विज्ञापन

00 
यह है बच्चों की डाइट का मेन्यू
जिला कारागार में बंदियों के लिए बनने वाले खाना दाल, रोटी, सब्जी के अलावा बच्चों के लिए अलग से दूध, फल, ब्रेड, बिस्किट की व्यवस्था होती है। बच्चों के बीमार होने पर उन्हें सरकारी स्तर पर चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है।
00 
बैरक के बाहर मैदान में लगे हैं झूले
बच्चों के खेलने के लिए बैरक के बाहर झूले लगे हैं, वहीं खिलौने भी मुहैया कराए गए हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि बच्चोें को उनके मन मुताबिक खेलने का पूरा मौका दिया जाता है। 
000 0
तीन बच्चों को कांवेंट में दिलाया जाएगा एडमिशन
महानिरीक्षक कारागार के निर्देश पर जेल प्रशासन तीन साल से ऊपर के तीन बच्चों का कांवेंट स्कूल में एडमिशन कराएगा। इस संबंध में डीएम को पत्र भेजा जा रहा है, जिससे इन बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मिल सके।
00 
बोले जिम्मेदार
फोटो-25
जेल प्रशासन का प्रयास है कि यहां से बाहर निकलने के बाद पढ़-लिखकर बच्चे समाज को नई दिशा देने के लिए काम करें, जो गलतियां उनके माता-पिता से हुईं हैं। उनका दंश इन बच्चों को न झेलना पड़े। इनमें एक बच्चा काफी मेधावी है। 
विज्ञापन

- राकेश कुमार, जेल अधीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें