शाहजहांपुर। करीब एक महीने से बंद मांगलिक कार्य सोमवार से फिर से शुरू हो जाएंगे। खरमास के समाप्त होने के बाद शुभ कार्याें की शुरुआत हो जाएगी। शुभ मुहूर्त की तिथियां आने के बाद बाजार में रौनक लौट आई है। मैरिज लॉन, बैंड, माली और कैटर्स भी बुक हो गए हैं। कपड़ा बाजार भी गुलजार हो गया है।
14 मार्च को सूर्य देव के मीन राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास शुरू होने से मांगलिक कार्य रुक गए थे। इसके चलते विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार आदि कार्य नहीं हो सके। रविवार की रात में भुवन भास्कर सूर्य देव बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर मंगल ग्रह की मेष राशि में प्रवेश करते ही मांगलिक कार्य का शुभारंभ हो जाएगा।
इसके बाद विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्य का रास्ता साफ हो गया है। मांगलिक कार्य शुरू होने से बाजारों में फिर से रौनक लौट आई है। एक महीने से इंतजार के बाद व्यापारियों के चेहरे खिल उठे हैं। बाजार एक बार फिर से गुलजार हो गया है। बरातों के शुभ मुहूर्त को देखते हुए लोगों ने मैरिज लॉन को बुक कराना शुरू कर दिया। शहर के अधिकांश बड़े लॉन बुक हो चुके हैं। इसी तरह बैंड-बाजा, लाइट, कैटर्स, माली आदि के पास भी तिथि खाली नहीं हैं।
शादियों के लिए यह तिथियां
अप्रैल: 14, 16, 18, 19, 20, 21, 25, 29, 30
मई: 1, 5, 6, 8, 10, 14, 15, 16,17, 18, 22, 23, 24, 27, 28
जून: 2, 4, 5, 7, 8, 9
-होलाष्टक और खरमास के चलते मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया था। 14 अप्रैल से नौ जून तक लगभग 30 दिन विवाह के शुभ मुहूर्त रहेंगे। इस अवधि के दौरान रुके हुए मांगलिक कार्य गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार, भूमि भवन, वाहन, मूर्ति प्रतिष्ठा नवीन कार्य आदि के अनेक शुभ मुहूर्त जून तक रहेंगे।
डॉ.कान्हा कृष्ण शुक्ला, पुजारी, श्री रुद्र बालाजी धाम
-मांगलिक कार्य शुरू होने को लेकर कुछ लोगों ने पहले ही तिथियों को बुक करा लिया था। आने वाली तारीखों को बुकिंग कराने को लोग आ रहे हैं। उम्मीद है कि सहालग का सीजन बेहतर जाएगा।
नाजिम खां, संचालक, मैरिज लॉन
-बरातों को लेकर खरीदारी का दौर शुरू हो गया। बाजार में रौनक लौट आई है। नवरात्रि से ही शादियों को लेकर खरीदारी लोगों ने करना शुरू कर दी थी। आने वाले समय में भी बेहतर कारोबार होने की उम्मीद है।
पूरन सिंह, कपड़ा व्यापारी
नाजिम खान, मैरिज लाॅन संचालक। स्रोत: स्वयं
नाजिम खान, मैरिज लाॅन संचालक। स्रोत: स्वयं
नाजिम खान, मैरिज लाॅन संचालक। स्रोत: स्वयं