शाहजहांपुर। बृहस्पतिवार रात को तेज हवाएं चलने से विभिन्न स्थानों पर लगे बैनर-होर्डिंग धराशायी हो गए। यही नहीं, बिजली की हाईटेंशन लाइनों को भी तेज हवाओं ने झकझोर दिया और उन पर पेड़ों की डालें टूटीं तो आधी रात के बाद शहर की बिजली सप्लाई ठप हो गई तो खेतों मेें गन्ना, गेहूं, लाही-सरसों आदि फसलें गिरने की आशंका में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं।
बृहस्पतिवार को सुबह से मौसम के बिगड़ैल तेवर दिख रहे थे, दोपहर को आसमान पर बादलों की परत गाढ़ी होने के साथ कुछ मिनट तेज हवा भी चली, जिससे घरों के दरवाजे-खिड़कियों के किवाड़ बजने लगे, लेकिन बाद में हवा का वेग थम गया। दिन ढलने के बाद मौसम ने अचानक करवट बदली और तेज बूंदाबांदी होने लगी। रात दस बजे बारिश थम गई, लेकिन पछुआ हवा तेज हो गई। हवा के थपेड़ों ने जोर पकड़ा तो शहर में अंटा चौराहा, टाउनहाल ओवरब्रिज, बस स्टेशन, गर्रा फाटक आदि कई स्थानों पर प्रचार को लगे बैनर-होर्डिंग उखड़ने लगे। कई स्थानों पर होर्डिंग तिरछे होकर क्षतिग्रस्त भी हो गए।
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शहर मेें आधी रात से हो गया ब्लैक आउट
बारिश के साथ चली तेज हवा ने अंधड़ का रूप लिया तो शहर में कई स्थानों पर बिजली की 11 केवीए हाईटेंशन लाइनों के तार आपस में टकराने लगे। शार्ट सर्किट के कारण महानगर के कई बिजली उपकेंद्रों से जुड़े फीडरों की लाइनों के जम्फर जल उठे। कुछ स्थानों पर लाइनों को शार्ट सर्किट से बचाने के लिए पहले ही बंद कर दिया गया। जीआईसी तिराहा के पास 11 केवीए लाइन के ऊपर पेड़ की डाल टूटकर गिर गई। तेज हवा से के कारण शहर के अब्दुल्लागंज, जमौर, ककरा कलां और निगोही रोड गदियाना स्थित 33 केवीए पावर सब स्टेशनों से जुड़े फीडर दो से चार घंटे तक बंद रहने से आधी रात से सुबह भोर होने से पहले तक शहर के अधिकतर इलाके अंधेरे में डूबे रहे।
हथौड़ा बिजली उपकेंद्र के प्रभारी अवर अभियंता कृष्ण कुमार पटेल ने बताया कि शहर मेें बृहस्पतिवार रात के समय कोई बड़ा लाइन फाल्ट नहीं हुआ, लेकिन शुक्रवार को दिन में 11 बजे सिटी पार्क के पास ट्रांसफार्मर की बुश बार जल गई, जिसे एक घंटे बाद ठीक कर लाइन के चालू दिया गया।
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दिन निकलते ही खेतों की ओर दौड़ पड़े किसान
किसानों को इस बात की आशंका थी कि तेज हवा के झोंकों से खेतों में खड़ी गन्ना, गेहूं, लाही-सरसों आदि फसलें गिर सकती हैं। इस चिंता में उन्हें रात भर चैन की नींद नहीं आई। इसीलिए सुबह होते ही किसान फसलों की देखभाल को खेतों की ओर दौड़ पड़े। गनीमत रही कि फसलें तेज अंधड़ से सुरक्षित रहीं क्योंकि पानी ज्यादा नहीं गिरने से खेतों की मिट्टी ज्यादा गीली नहीं हो पाई और इसीलिए पौधे उखड़ नहीं पाए। बता दें कि इस वर्ष रबी सीजन में 2.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, 20 हजार हेक्टेयर में आलू, 7800 हेक्टेयर में राई-सरसों और लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मसूर की फसलें बोई गई हैं।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के अनुसार गन्ने की अधिकतर किसान पहले ही बंधाई कर चुके हैं। गेहूं पौधों का अभी वजन नहीं बढ़ा है क्योंकि उनमें बालियां पड़ने की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि सभी फसलें अभी सुरक्षित हैं, फिर कृषि प्रसार अधिकारियों ओर पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कहीं फसल गिरने की सूचना मिले तो तत्काल मौके पर जाकर फसली क्षति का आकलन कर रिपोर्ट भेजें।
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तेज हवा में फसलें गिरने की नौबत तभी आती है, जब कम से कम दस मिमी बारिश होने से खेतों की मिट्टी इतनी गीली हो जाए कि पौधे जड़ छोड़ने लगें। बृहस्पतिवार को देर रात केवल 0.6 मिमी वर्षा हुई। बारिश से हवा में नमी बढ़ने के कारण रात में न्यूनतम तापमान भी एक डिग्री घटकर 11.3 डिग्री रह गया, लेकिन दिन में धूप से अधिकतम तापमान में 0.3 डिग्री सेल्सियस की मामूली वृद्धि हुई है। बैरोमीटर की रीडिंग सामान्य से आठ अंक अधिक होने के कारण शनिवार को सुबह कुछ देर कोहरा छाने के बाद तेज हवा चलने और धूप निकलने की की संभावना है।
-डॉ. मनमोहन सिंह, मौसम वैज्ञानिक, गन्ना शोध परिषद