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सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा बुधवार, पारा सात डिग्री धड़ाम, शीतलहर बढ़ाएगी गलन

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शाहजहांपुर। इस सीजन का सबसे ठंडा दिन बुधवार रहा। मंगलवार की रात भी सबसे ज्यादा ठंडी रही। बुधवार को अधिकतम तापमान सात डिग्री गिरकर 10.2 पर पहुंच गया। जबकि न्यूनतम 6.1 डिग्री सेल्सियस रहा। बुधवार को सुबह से शाम तक कोहरा छाया रहा और पछुआ हवा चलने से सारे दिन लोग ठिठुरते रहे। शीतलहर चलने से गलन पैदा हुई। क्रिसमस की छुट्टी के दिन अधिकांश नौकरीपेशा लोग घरों में रहे। ठंड की वजह से बाजारों में रौनक कम रही। हालांकि, बहादुरगंज बुध बाजार में थोड़ी भीड़ बढ़ी और लोगों ने फुटपाथ पर गर्म कपड़े, जैकेट, मफलर, दस्ताने आदि की खरीददारी की। मगर दिन ढलते ही बाजार में सन्नाटा छा गया। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो पांच से सात किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही पछुआ हवा के असर से बृहस्पतिवार को सुबह शीतलहर चलेगी और कोहरा छाए रहने से तापमान में भी गिरावट जारी रहेगी।
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बीते शनिवार और रविवार को दिन में कड़ाके की धूप से सर्दी से काफी राहत मिली थी, लेकिन सोमवार को सुबह से शाम तक बादल छाए रहने से तापमान गिरकर 13.5 डिग्री सेल्सियस रह गया था। बीते दिन हल्की धूप निकली, लेकिन पछुआ हवा से दिन भर वातावरण में गलन बनी रही। नतीजे मेें शाम से सर्दी फिर बढ़ने लगी और बीते 24 घंटे की तुलना में मंगलवार रात में तापमान 1.3 डिग्री घटकर 6.1 डिग्री सेल्सियस के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले 19 दिसंबर की रात न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस के न्यूनतम स्तर पर पहुंचा था।
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार आने वाले दिनों में सर्दी बढ़ने के साथ तापमान गिरने का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने बृहस्पतिवार को सुबह कोहरा छाए रहने और दिन-रात के तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आने का पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए कहा कि दिन और रात के तापमान मेें अंतर घटने से भीषण सर्दी का अनुमान है।
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कोहरा-पाला से आलू बचाने को खेत पर जलाएं धूनी
कृषि वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण मोहन सिंह के अनुसार इंडो ब्लाइट कास्ट (पैन इंडिया मॉडल) नामक डिवाइस से कोहरे का फसलों पर प्रभाव जांचे जाने से पता चला है कि मध्य यूपी के जनपदों में बोई गई आलू की फसल पर पिछैता झुलसा बीमारी का प्रकोप संभव है। इस बीमारी के लक्षण आलू पौध की पत्तियों पर लाल चकत्तों के तौर पर उभरते हैं। उपचार नहीं किए जाने पर चकत्तों का आकार बढ़ने के साथ पत्तियां किनारे से सूखने लगती हैं। उन्होंने कहा कि किसान भाई आलू की फसल को कोहरा-पाला से बचाने के लिए खेत की मेड़ पर हवा की विपरीत दिशा मेें फूस जलाकर धुंआ दें ताकि वह खेत की पूरी फसल पर फैलकर कोहरा काट सके। डॉ. सिंह ने कहा कि जिन किसान भाइयों ने अभी फफूंदनाशक का छिड़काव नहीं किया है, वे मैंकोजेब/प्रोपीनेब/क्लोरोथेनोनील आदि की दो से 2.5 ग्राम मात्रा एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में बीमारी के लक्षण प्रकट हो चुके, उनमेें फसल सुरक्षा के लिए साइमोक्सेनिल एवं मैंकोजेब की तीन किलो मात्रा एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़की जा सकती है। विकल्प के तौर पर फेनोमिडोन एवं मेंकोजेब अथवा डाइमेथोमार्फ एवं मैंकोजेब मिश्रण की तीन किलो मात्रा एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रयोग की जा सकती है, लेकिन एक ही फफूंद नाशक का किसान बार-बार इस्तेमाल करने से बचें।
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