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आंधी और बरसात से फिर बिगड़ा मौसम, दोपहर को रात जैसा दिखा नजारा

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शाहजहांपुर। तूफान जैसी चक्रवाती हवाओं के साथ आंधी और बारिश को 72 घंटे भी नहीं बीते थे कि रविवार को दोपहर फिर मौसम ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया। दिन में दो बजे तक हल्की धूप के साथ उमस भरी गर्मी महसूस होती रही, लेकिन बाद में आंधी जैसी पछुआ हवा के साथ काली घटाओं ने आसमान ढक लिया तो अंधेरा छा गया। हवा के तेज थपेड़ों ने बिजली नेटवर्क को झकझोर कर रख दिया। जगह-जगह लगे होर्डिंग धराशायी हो गए और हाईटेंशन लाइनों पर पेड़ की डालें टूटकर लटकीं तो महानगर समेत जिले के 700 से ज्यादा गांवों की बत्ती गुल हो गई। इस दौरान पांच मिमी बारिश होने से हवा में नमी के साथ ठंडक घुली तो थर्मामीटर का पारा चार डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया।
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गत बुधवार को दिन मेें आंधी और बारिश के साथ ग्रामीण क्षेत्र में ओले गिरने से हवा में नमी बढने के साथ थर्मामीटर का पारा करीब पांच डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया था। यही नहीं, बृहस्पतिवार को तड़के 3.30 बजे आई विकराल आंधी ने बिजली नेटवर्क को तहस-नहस कर दिया था। मौसम ने यही तेवर आज फिर दिखा दिए। दिन में तीन बजे से आंधी के साथ काली घटाएं छाईं तो अंधेरा इतना घना हो गया कि रात जैसी लगने लगी। सड़कों पर वाहनों की हेड लाइटें जल उठीं। जो लोग बाजारों में खरीददारी के मकसद से निकले थे, वह घरों तक नहीं पहुंच पाए कि बादलों की गडग़ड़ाहट और बिजली की चमक के साथ बारिश शुरू हो गई। नतीजे में जो दुकानें शाम छह बजे बंद होनी थीं, उनके शटर दो घंटे पहले गिरने लगे क्योंकि ग्राहकों से गुलजार बाजार सूने पड़ चुके थे।
तिलहर। धूल भरी आंधी के साथ बारिश होने से मौसम खुशगवार हो गया और दिन के समय अंधेरा छा गया। आंधी से आम की फसल को भारी क्षति हुई है। आंधी से बाजार में दुकानों के बाहर रखा सामान उड़कर सड़कों पर बिखर गया। जिससे बाजार में अफरातफरी मच गई। लगभग आधे घंटे से अधिक समय तक आंधी रहने के बाद बारिश शुरू हो गई। इस कारण गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली।
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खुदागंज। तेज आंधी और बरसात से पेड़ उखड़े तो बिजली लाइनों के तार टूटकर जमीन पर आ गिरे। इससे नगर समेत आसपास के गांवों की बत्ती गुल हो गई। आंधी से बागों में आम की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन भीषण गर्मी से जूझ रहे जनजीवन को बारिश से थोड़ी ठंडक मिल गई।
महानगर समेत 700 से ज्यादा गांवों की बत्ती गुल
आंधी ने विकराल रूप लिया तो पुवायां रोड पर पावर कारपोरेशन केे 220 केवी ट्रांसमिशन स्टेशन से महानगर समेत ग्रामीण क्षेत्र की 132 और 33 केवी क्षमता वाली सभी लाइनें शार्ट सर्किट से बचाने के लिए बंद कर दी गईं। यह एहतियात बरतने पर भी कई स्थानों पर पेड़ की डालें टूटकर एचटी लाइनों पर गिरने लगीं। चिनौर के पास गोविंदगंज उप केंद्र की 33 केवी मेन लाइन पर डाल टूटकर गिरी। इसी तरह ककरा कलां, कैंट क्षेत्र में सेना के चांदमारी मैदान के पीछे, गर्रा फाटक के पास अब्दुल्लागंज उपकेंद्र की मेन लाइन, हथौड़ा सब स्टेशन के हयातपुरा फीडर की लाइनें भी चौपट हो गईं। एक्सईएन (ट्रांसमिशन) आरके उपाध्याय के अनुसार शहर और ग्रामीण क्षेत्र की सभी लाइनें दो घंटे तक बंद रखने के बाद शाम पांच बजे चालू कर दी गईं लेकिन आंधी थमने के बाद देर तक बारिश और बूंदाबांदी जारी रहने से जगह-जगह हुए लाइन फाल्ट सुधारने में वक्त लग गया। महानगर के ककरा कलां, बहादुरगंज, अब्दुल्लागंज आदि क्षेत्रों में शाम 5.30 बजे से बिजली आपूर्ति सामान्य होने लगी, लेकिन शहर के अन्य इलाकों समेत सैकड़ों गांवों में बिजली संकट कब तक दूर होगा, इस बारे में विभागीय अभियंता कुछ बता नहीं सके।
आंधी से रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित
रोडवेज बसों का जिले के विभिन्न मार्गों पर रविवार को पांचवें दिन भी सुबह सात बजे से संचालन सामान्य तरीके से शुरू हुआ। जलालाबाद, पुवायां, तिलहर रूट पर निकलीं पहली ट्रिप की बसों में यात्री 10-15 तक सीमित रहे। दिन में 11 बजे से स्थानीय मार्गों के यात्री थोड़े बढ़े। दो बजे खुटार और अल्हागंज मार्ग की बसों में औसतन 15-20 यात्री चढ़े, लेकिन बाद में मौसम बिगड़ा तो स्टेशन पर यात्री पहुंचने भी बंद हो गए। शाम पांच बजे तक मौसम खराब रहने और यात्री नहीं मिलने से कई मार्गों पर अंतिम सेवा की बसें रद्द करनी पड़ीं। परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार बीते दिन की तुलना में आज यात्री कम हैं और उसी अनुपात में आमदनी भी कम होने के आसार है। बता दें कि शनिवार को 567 यात्रियों ने रोडवेज से सफर किया और उनसे निगम को 24715 रुपये किराया मिला, लेकिन डीजल पर 25193 रुपये खर्च हो गए। अधिकारी भी मानते हैं मौसम खराब होने से राजस्व में कमी आएगी।
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