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Shahjahanpur News: गोमती पदयात्रा पर निकली वाटर वुमन शिप्रा पहुंचीं सुनासिरनाथ धाम

Sun, 05 Mar 2023 12:56 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
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सुनासिरनाथ धाम पहुंची शिप्रा पाठक। संवाद
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पुवायां (शाहजहांपुर)। पंचतत्व फाउंडेशन की संस्थापक शिप्रा पाठक ने तीन दिन पूर्व गोमती नदी के उद्गम स्थल पीलीभीत की फुलहर झील से पदयात्रा शुरू की थी। शनिवार को वह शाहजहांपुर की सीमा में सुनासिरनाथ धाम पहुंचीं। पुवायां क्षेत्र में नदी के पुनर्जीवन कार्य में पहले से कार्यरत लोकभारती की टोली पदयात्रा में सहयोगी की भूमिका में है।
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शिप्रा पाठक पीलीभीत के माधोटांडा स्थित गोमती के उद्गम स्थल से बनारस के कैथी घाट तक पैदल यात्रा पर निकली हैं। यात्रा का उद्देश्य नदी किनारे के गांवों के लोगों को नदी की स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। इसके अलावा नदी किनारे पड़ने वाले अति प्राचीन शिवालयों को भी सूचीबद्ध करना है। पदयात्रा के शाहजहांपुर सीमा में प्रवेश करने पर देवेश गंगवार सहित तमाम लोगों ने शिप्रा पाठक का स्वागत किया।
शिप्रा के साथ संत बाबा राघव दास, आरएसएस के प्रांतीय घोष प्रमुख ललित कुमार, रविंद्र कुमार नंद, शैलेश पाठक, अंकित पाठक, सृष्टि शर्मा भी मौजूद रहीं। दोपहर में यात्रा झोकननाथ घाट पहुंची। भोजन और विश्राम के बाद यात्रा बंडा के सुनासिर नाथ घाट पहुंची। यहां शिप्रा पाठक सहित तमाम लोगों ने भगवान शिव के मंदिर में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। रविवार को यात्रा आगे रवाना होगी। इस दौरान विपिन मिश्रा, प्रदीप बैरागी, देवेश गंगवार, सुधीर मिश्रा, ओमपाल शुक्ला, अंकुर अवस्थी, सच्चिदानंद पांडे, सहर्ष शर्मा, सुशील कुमार, प्रांशु वर्मा, रामनिकेत मिश्रा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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नर्मदा की भी परिक्रमा कर चुकी हैं शिप्रा
गोमती नदी की पदयात्रा से पूर्व शिप्रा पाठक नर्मदा नदी की परिक्रमा कर चुकी हैं। वह देश भर में नदियों के संरक्षण के लिए काम कर रही हैं। लोगों को जागरूक कर रही हैं कि नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने से ही मानव का कल्याण होगा। वह गोमती नदी किनारे खेतों से होती हुईं आगे बढ़ रही हैं।
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पर्यावरण संरक्षण हमारी भी जिम्मेदारी : शिप्रा
सुनासिरनाथ धाम पर शिप्रा पाठक ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि पर्यावरण की जिम्मेदारी अकेले सरकार की नहीं है। कुछ कर्तव्य हम सबका भी बनता है। हम प्रकृति को कुछ न देकर सब लेते जा रहे हैं। जंगल खत्म हो रहे हैं। जल का स्तर गिरता जा रहा है। इसके जिम्मेदार बहुत हद तक हम लोग स्वयं है।
उन्होंने कहा कि हम सभी लोग एकत्र होकर अगर एक साथ प्रकृति के प्रति समर्पित रहेंगे तभी परिवर्तन संभव है, अन्यथा एक दिन ऐसा आएगा की हमारे वातावरण में प्रदूषण की मात्रा इतनी ज्यादा हो जाएगी कि हम सांस में ऑक्सीजन के साथ जहर भी लेने लगेंगे। इस दौरान लोकभारती के राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख नीरज सिंह ने कहा कि शिप्रा पाठक की पदयात्रा से नदी क्षेत्र के ग्रामीणों में अधिक जागरूकता आएगी और ऊर्जा का संचार होगा।
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