शाहजहांपुर। नरौरा बैराज से पानी की निकासी बढ़ जाने से कलान के भैंसार बांध पर गंगा के जलस्तर मेें शनिवार को तीसरे दिन भी चार सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। उधर, पीलीभीत के ड्यूनी डाम से दो दिन पहले पास किए गए 8200 क्यूसेक पानी के यहां पहुंचने पर 24 घंटे में गर्रा नदी में 25 सेमी पानी बढ़ गया।
उत्तराखंड के कई बांधों-बैराजों से 9630 क्यूसेक पानी पास किए जाने से जनपद की जलालाबाद व कलान तहसील में अगले 24 घंटे के दौरान रामगंगा में पानी बढ़ने का अनुमान है। परौर क्षेत्र में रामगंगा और सदर तहसील में सेहरामऊ दक्षिणी के आसपास गर्रा के तटीय गांवों में भूमि कटान जारी है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार पहाड़ों और पश्चिमी उप्र के मैदानी इलाकों में बारिश होने से गंगा व रामगंगा में पानी बढ़ रहा है। नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी की निकासी 6840 क्यूसेक बढ़कर 31900 क्यूसेक हो गई है, लेकिन पानी की इस मात्रा के अनुपात में गंगा का जलस्तर ज्यादा इसीलिए बढ़ा क्योंकि उसमें बारिश का पानी भी सिमट रहा है।
बताया गया कि रामगंगा में 24 घंटे बाद अतिरिक्त पानी की निकासी फिर शुरू हो जाने से रविवार को रामगंगा में भी पानी बढ़ने का अनुमान है। गर्रा नदी में पानी की निकासी 1879 क्यूसेक घटकर 530 क्यूसेक कर दिए जाने से उसमें रविवार तक पानी कम होने की दशा में भूमि कटान तेज होने की आशंका है।
नदियों का जलस्तर (मीटर गेज में) : एक नजर
नदी खतरे का निशान मौजूदा जलस्तर जलस्तर में वृद्धि/कमी
गंगा 143.65 142.30 +0.04
रामगंगा 161.50 159.20 -0.23
गर्रा 148.80 146.25 +0.25
खन्नौत 145.75 143.30 - 0.05
रामगंगा : जलस्तर घटने के बावजूद नहीं थमा भूमि कटान
परौर। एक दिन पहले रामगंगा मे पानी बढ़ने से भूमि कटान धीमा हुआ, लेकिन शनिवार से नदी में जलस्तर घटने के कारण क्षेत्र के मोहनपुर, नारायणनगर, दहेलिया, बिचपुरी आदि गांवों में किनारे की जमीनें कटने का सिलसिला जारी रहा। उपजाऊ जमीनें कटने से इन तीनों गांवों समेत मंझा और हैदलपुर के काश्तकार भी परेशान हैं।
किसानों का अनुमान है कि इस वर्ष इन गांवों में करीब 300 बीघा जमीनें नष्ट हो चुकी हैं। अभी मानसून का सिर्फ एक माह बीता है इसलिए किसान आगे बारिश होने और बाढ़ आने की दशा में ज्यादा नुकसान होने से आशंकित हैं। उधर, फट चुके रबर के जिओ ट्यूब बदले नहीं जाने से कटान रोकने में दिक्कत आ रही है, लेकिन सिंचाई विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। संवाद
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कटान की आशंका से ग्रामीण परेशान
सेहरामऊ दक्षिणी। गर्रा नदी में आई बाढ़ का प्रकोप थमने के बाद शनिवार सुबह से नदी में पानी बढ़ा देख उन किसानों की धड़कनें बढ़ गईं, जिन्हें बाढ़ में फसलों समेत जमीनें कटने का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, नदी चढ़ने से क्षेत्र के उटहा और गौंटिया गांव में कटान की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है, लेकिन ग्रामीणों को भय है कि पानी उतरने पर नदी फिर से किनारे की बची जमीनों को काटना शुरू कर देगी।
गांव उटहा निवासी सुनील कुमार वर्मा, राजेंद्र प्रसाद, वासुदेव, नीरज कुमार आदि ने बताया कि गांव वालों की कई बीघा कृषि भूमि में खड़ी फसलें बाढ़ और कटान से नष्ट हुईं हैं, लेकिन अब तक लेखपाल ने सर्वे नहीं किया है। उधर, मियांपुर के मजरा गौंटिया में शनिवार सुबह से दोपहर तक नदी ने देवकी, राम सनेही, विमला देवी, मेम्बर, हरिपाल, राम नाथ आदि की करीब 12 बीघा भूमि काट दी। वहां भी अब तक लेखपाल नहीं पहुंचे हैं। संवाद