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गंगा में तीन सेमी पानी और बढ़ा, ग्रामीणों को खाने-पीने और दवाओं का संकट

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शाहजहांपुर/ मिर्जापुर। गंगा का जलस्तर तीन सेंटीमीटर बढ़ने से मंगलवार को ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ गईं। कई गांवों टापू में तब्दील हो गए, जिससे लोगों के खाने-पीने और दवाओं का संकट बढ़ गया। पशुओं के लिए चारा बमुश्किल मिल पा रहा है। मंगलवार को एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी और कलान के एसडीएम रमेश बाबू ने नाव से आजाद नगर और इस्लामनगर इलाके में जाकर हालात का जायजा लिया और पीड़ितों को मदद आश्वासन देकर लौट आए।
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गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को पानी बढ़ने से हालात और बिगड़ गए। जलस्तर के बढ़ने से अन्य सहायक नदियां भी उफान पर हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को यूपी और उत्तराखंड के बैराजों से मिली सूचना के अनुसार मंगलवार को गंगा, रामगंगा में 150852 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ है। गंगा में दो दिन पहले निकाले गए 1.83 लाख क्यूसेक पानी से कलान के भैंसार बांध पर नदी का जलस्तर मंगलवार को तीन सेमी बढ़ गया। इस कारण मिर्जापुर क्षेत्र में बाढ़ से घिरे ग्राम आजाद नगर, इस्लाम नगर, चौंरा के अलावा मस्जिद नगला और पैलानी उत्तरी में भी पानी गांव के अंदर पहुंच जाने से ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है। जिन घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया है, वहां के लोगों ने छतों पर शरण लेकर वहीं अपने चूल्हे रख लिए, लेकिन झोपड़ियों में गुजारा करने वालों को खान-पान की चीजों के अलावा सिर छिपाने के लिए सुरक्षित ठिकाने खोजते रहे।
जिन ग्रामीणों के खेत गंगा के किनारे हैं, उन्हें फसल डूबने से नष्ट होने की चिंता परेशान कर रही है। धान और शकरकंद की फसल को ज्यादा नुकसान होने का अनुमान है, लेकिन अभी तक राजस्व विभाग की टीमों ने फसली नुकसान का सर्वे करने की जरूरत नहीं समझी। इसी तरह जिन ग्रामीणों के पास पशु हैं, वह उनके हरे चारा, भूसा आदि की कमी को लेकर परेशान हैं। जिन परिवारों में छोटे बच्चे हैं, उन्हें दूध की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अधिकारी राहत सहायता देने के लिए बाढ़ की स्थिति भयावह होने का इंतजार कर रहे हैं।
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आजाद नगर के ग्रामीणों को उपलब्ध कराई नाव
मिर्जापुर। आजादनगर पहुंचे एडीएम और एसडीएम ने भी माना कि आजादनगर और इस्लामनगर के लोग बाढ़ से घिरे हैं, लेकिन राहत सामग्री बांटने की जरूरत नहीं समझी। पूछे जाने पर दोनों अधिकारियों ने कहा कि स्थिति अभी भयावह नहीं हुई है और बुधवार तक पानी कम हो जाने की उम्मीद है। एडीएम ने कहा कि शासन से अनुमन्य खाद्यान्न किट का वितरण किया जाएगा। आजादनगर के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए नाव की व्यवस्था कर दी गई है। आजाद नगर के कुछ घरों में पानी पहुंचा है और उन्हीं घरों के लोग ऊंचे स्थानों पर पहुंच रहे हैं। शेष ग्रामीण अभी भी गांव में ही बसे हुए हैं। एसडीएम ने ग्रामीणों को बताया कि फसली नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीम को लगा दिया गया है।
खुदागंज क्षेत्र में उफनाई गर्रा में डूबीं फसलें
खुदागंज। पीलीभीत के ड्यूनी डाम से अतिरिक्त पानी की निकासी से देवहा (गर्रा) नदी में उफान आ गया है। इलाके के रामेश्वरगंज गौंटिया, खिरिया, म्यूना, पहाड़ीपुर भोपत, मकरंदापुर, अभयपुर, हरदेनी देहात माली, मुतिया आदि गांवों के खेतों में खड़ी गन्ना, धान, तिल आदि फसलें डूब गई हैं। तिलहन की फसलें पानी से ज्यादा प्रभावित हैं। धान में पानी ज्यादा दिन तक भरे रहने से फसल नष्ट होने की आशंका से किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। कई गांवों मेें घरों के आगे तक पानी पहुंच जाने ग्रामीण भयभीत हैं।
खन्नौत मेें डूबे लोधीपुर के निर्माणाधीन मकान
शाहजहांपुर। रामगंगा की सहायक नदी गर्रा और खन्नौत का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। 24 घंटे में गर्रा 45 सेमी बढ़कर 147.10 मीटर पर पहुंच गई है। तीन दिन में गर्रा का जलस्तर 1.85 मीटर बढ़ चुका है। इधर, मामूली वर्षा के बावजूद खन्नौत का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से 25 सेमी बढ़कर 144.05 मीटर हो गया। लोधीपुर पक्का पुल के पास निर्माणाधीन कई मकान बाढ़ की चपेट में आ गए। बारिश होने की दशा में खन्नौत में पानी बढ़ना तय है और ऐसी स्थिति में खन्नौत तट के किनारे बसी इंदिरानगर कॉलोनी और प्रताप एनक्लेव कॉलोनी पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगेगा।
परौर क्षेत्र में निष्क्रिय पड़ीं बाढ़ चौकियां
परौर। क्षेत्र के बाशिंदे करीब दो दशक से रामगंगा की बाढ़ का कहर झेल रहे हैं। हर साल बाढ़ के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ चौकियों की स्थापना की जाती है, लेकिन इस वर्ष क्षेत्र की अधिकांश बाढ़ चौकियां निष्क्रिय पड़ी है। वहां न तो कोई सामान पहुंचा और न ही राहत सहायता देने को कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। उधर, चिकित्सा व्यवस्था पहले से पटरी से उतरी है क्योंकि पीएचसी और पशु अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टर के पद रिक्त होने से वहां दवाओं का अकाल बना रहता है। रामगंगा की कटरी में जानवरों की आवाजाही बंद होने के कारण पशुओं को घास नहीं मिल रही। रामगंगा के किनारे खड़ी तिल, बाजरा, शकरकंद आदि फसलें बाढ़ में डूब चुकी हैं।
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की बात
अधिकारियों से उम्मीद थी कि उनसे सिर छिपाने के लिए पन्नी और खाने के लिए कुछ राशन सामग्री मिलेगी, लेकिन यह आस पूरी नहीं हुई।
- बशीर, आजादनगर
फसल नुकसान के लिए गठित राजस्व टीम अभी तक गांव नहीं आई है। कर्मचारी तहसील पर ही बैठकर कागजों में ही सब कुछ निपटा देंगे।
- इशहाक मोहम्मद, आजादनगर
चार दिन से बच्चों और महिलाओं का दर्द किसी ने नहीं सुना। अधिकारी रोड तक आए और दौरे की खानापूर्ति करके लौट गए।
- जमन शेर, आजाद नगर
आजाद नगर चारों ओर पानी से घिरा है और वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए नाव उपलब्ध करा दी गई है। इस्लामनगर के सिर्फ पश्चिमी हिस्से में थोड़ा पानी पहुंचा है। दौरे मेें साथ रहे सिंचाई विभाग के एक्सईएन आर के वर्मा ने बताया है कि दो दिन पहले नरौरा से निकले 1.83 लाख क्यूसेक पानी के आगे निकलने पर गंगा के जलस्तर में कमी आ जाएगी। बाढ़ प्रभावित परिवारों को बुधवार से खानपान और अन्य जरूरत वाली 17 वस्तुओं की किट बुधवार से बांटी जाएंगी।
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- गिरिजेश कुमार चौधरी, एडीएम फाइनेंस/प्रभारी आपदा राहत प्रकोष्ठ
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