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गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट और दुकानें जलमग्न

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मिर्जापुर। ढाईघाट में चल रहे माघ मेला के दौरान शनिवार शाम को अचानक गंगा के जलस्तर में वृद्धि हो जाने से कई पश्चिमी घाट और दुकानें जलमग्न हो गईं। इससे कल्पवासियों को अपनी झोपड़ियां छोड़कर इधर-उधर समय बिताना पड़ा।
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शनिवार शाम अचानक ढाईघाट में गंगा का जलस्तर बढ़ गया। इससे मेले में पक्के पुल से पश्चिम की ओर कई घाट और घाटों के किनारे लगीं दुकानें जलमग्न हो गईं। दुकान के स्वामी अपनी लगी हुई दुकानों को छोड़कर दूसरी जगह चले गए। दुकानदारों ने बताया कि रविवार दाोपहर से गंगा के जलस्तर में कमी शुरू हो गई है। जलस्तर कम होते ही वे लोग फिर अपनी दुकानें उसी जगह सजा लेंगे। जिला पंचायत प्रशासन ने घाटों पर दुकानें लगाने वाले दुकानदारों से गंगा किनारे से दूर दुकानें लगाने की सलाह दी है। संवाद
बजट 20 लाख, फिर भी सुविधाओं का अकाल
ढाईघाट मेले में श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर जिला पंचायत प्रशासन 20 लाख से अधिक का बजट खर्च कर रहा है। फिर भी कल्पवासियों को पेयजल और निशुल्क शौचालय की सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। पौष पूर्णिमा से ढाईघाट गंगातट पर कल्पवास कर रहीं रामवती, राम निहोरे, जगपाल, प्रेमपाल, रामदुलारे, जीवनलाल आदि ने बताया कि मेले में पेयजल और शौचालय की भारी तकलीफ है।
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श्रद्धालुओं का आरोप है कि मेले की अधिकांश सुविधाएं कुछ खास पंडों और संतों के पंडालों में ही मिल रहीं हैं। आम कल्पवासियों को पानी और शौचालय के लिए भटकना पड़ रहा है। आरोप है कि ढाईघाट मेले में तहबाजारी वसूली में भी खेल किया जा रहा है। कई दुकानदारों ने बताया कि जिला पंचायत के कर्मचारी बाजार में दुकान के बजाय फड़ की रसीद देते हैं और वसूली दुकानों की कर रहे हैं।
ऐसा आरोप वहीं दुकानदार लगा रहे हैं, जिन्हें दुकान लगाने के लिए मनचाही जगह नहीं मिली है। मेले में संतों के पंडालों में शौचालय बनवाए गए हैं। वहीं, पंडों को शौचालय बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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तुलसीराम, मेलाबाबू जिला पंचायत मेला ढाईघाट
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