शाहजहांपुर/परौर। उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण रामगंगा में पानी बढ़ने लगा है। रामगंगा की धारा परौर के मजरा नारायणनगर पश्चिमी में सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई ठोकर के पास पहुंच गई है। इससे ग्रामीण बाढ़ की संभावित विपत्ति को लेकर खासे परेशान हैं, लेकिन सिंचाई विभाग ने गांव को बाढ़ से बचाने के लिए अभी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं।
करीब दो दशक से रामगंगा परौर समेत आसपास के गांवों में कटान करके उनका अस्तित्व मिटाने पर तुली है। पहले परौर, कुंडलिया, हैदलपुर, दहेलिया, कुंडरी आश्रम, बोझी आदि गांवों की बेशकीमती उपजाऊ जमीनें काटकर तमाम किसानों को भूमिहीन कर चुकी है। एक दशक पहले आई भयंकर बाढ़ में नारायणनगर पूर्वी और मंझा गांव पूरी तरह कट गए। इस कारण क्षेत्र के तमाम किसान और उनके परिवार के युवा दिल्ली, बरेली, फर्रुखाबाद आदि शहरों में मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पाल रहे हैं। बाद में रामगंगा ने बीते दो-तीन वर्षों में परौर के मजरा मोहनपुर, बिचपुरी और बाजार को अपना निशाना बनाया।
जब परौर कटान के कगार पर आया और किसी ने गांववासियों की नहीं सुनी तो उन्होंने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। क्षेत्रीय विधायक वीर विक्रम सिंह के प्रयास से परौर के मजरों को बाढ़ से बचाने के लिए गत वर्ष 14 कच्चे तटबंधों का निर्माण कराया गया। इससे तमाम गांव कटान से बच गए, लेकिन संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। पिछले साल सिंचाई विभाग ने नारायणनगर पश्चिमी के पास कच्ची ठोकरें बनवाईं, लेकिन उनके रखरखाव का काम अभी अधूरा पड़ा है। नारायणनगर पश्चिमी के अवधेश कश्यप, हरिओम कुशवाहा, कृष्णपाल, रामविलास कुशवाहा, सोरन कुशवाहा, सुनील कुमार, झुमक लाल कश्यप आदि ने गांव को बाढ़ से बचाने को जरूरी कदम जल्द उठाए जाने की मांग की है।
रामगंगा में अभी बाढ़ की कोई आशंका नहीं है। रामनगर और कालागढ़ डॉम के अधिशासी अभियंता के स्तर से अभी इस बारे में कोई चेतावनी भी जारी नहीं हुई। उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के मैदानी इलाकों, विशषकर नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश का पानी सिमटकर नदियों में जा रहा है। बारिश के कारण रामगंगा में थोड़ा पानी बढ़ा है। नदियों के किनारे बनाए गए कच्चे-पक्के तटबंधों की मरम्मत लगातार कराई जा रही है। -सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग