शाहजहांपुर। पुराने जिला अस्पताल में दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाना आसान नहीं हैं। दूर-दराज से आने वाले दिव्यांगों की परवाह किए बिना डॉक्टर अपनी सुविधा के अनुसार ही पहुंचते हैं। ऐसे में दिव्यांगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। नंबर नहीं आने पर अगली बार फिर से दौड़ लगानी होती है।
सीएमओ कार्यालय के पास ही हर सोमवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए जाते हैं। प्रमाणपत्र जारी होने से पहले डॉक्टरों का बोर्ड दिव्यांगों का परीक्षण करता है। उनकी दिव्यांगता का परीक्षण करने के बाद ही प्रमाणपत्र जारी होता है। लेकिन, यहां भी डॉक्टरों की मनमानी हावी है। सोमवार को दूर-दराज से सुबह साढ़े नौ बजे से दिव्यांगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। दस बजे तक उनकी भीड़ लग गई। उसके काफी देर के बाद ईएनटी विभाग के डॉक्टर पहुंच गए। दिव्यांगों के अनुसार, हड्डी के डॉक्टर दोपहर 12 बजे के बाद आए। ऐसे में दिव्यांगों का परीक्षण काफी देर में शुरू हो सका। सुबह दस बजे से आए दिव्यांगों का नंबर दोपहर दो बजे के बाद तक नहीं आ सका था। ऐसे में उनमें काफी ज्यादा रोष व्याप्त था। सिर छिपाने के लिए टिन और पेड़ों के नीचे छाया तलाश करते हुए दिव्यांग नजर आए।
चार घंटे के बाद भी नहीं आया नंबर
-जलालाबाद के गांव कुड़रा से आए कप्तान सुबह पौने दस बजे कार्यालय पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि हड्डी के डॉक्टर देरी से आए। दोपहर दो बजे तक उनका नंबर नहीं आ सका।
पिछली बार भी लौटना पड़ा था
-जलालाबाद की सनाय गांव की सुदामा देवी भी अपनी बारी का इंतजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि पिछले सोमवार को भी उनका नंबर नहीं आ सका था। इसलिए लौटना पड़ा था।
हड्डी के डॉक्टर अस्पताल में मरीजों को देखने के बाद आते हैं। डॉक्टर की मांग के लिए दो माह पहले निदेशालय में पत्र भेजा था। डॉक्टर की तैनाती होने के बाद व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। डॉ. आरके गौतम, सीएमओ