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शरीर तोड़ रहा वायरल बुखार, डेंगू का डंक भी बना रहा बीमार

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शाहजहांपुर। मलेरिया के केस थोड़े कम होने के बाद डेंगू का डंक हावी हुआ है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में नौ मरीज भर्ती हैं जिनमें छह में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। जबकि तीन की जांच रिपोर्ट सरकारी लैब से आना बाकी है। सरकारी आंकड़ों में जनवरी से अब तक डेंगू के मात्र 17 मरीज ही दर्ज हैं। वायरल बुखार भी लोगों को चपेट में लेकर कई दिन तक बिस्तर पर रहने को मजबूर कर रहा है।
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दिवाली के बाद सर्दी ने दस्तक देना शुरू कर दी है। सुबह-शाम की ठंड के चलते लोगों पर वायरल बुखार का खतरा मंडराने लगा है। बुखार, जुकाम, बदन दर्द व खांसी से पीड़ित मरीज राजकीय मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। अस्पताल में तीन फिजिशियन के चैंबर के बाहर वायरल से पीड़ित मरीजों की लाइन लग रही है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 50 प्रतिशत वायरल बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। बुखार से पीड़ित मरीज में डेंगू जैसे लक्षण नजर आने पर उसकी जांच कराई जा रही है। वहीं मेडिकल कॉलेज में बने डेंगू वार्ड में लापरवाही बरती जा रही है। शनिवार को डेंगू वार्ड में मरीजों के तीमारदार मिले। इसमें बच्चे भी शामिल थे। डेंगू वार्ड में बच्चों को लेकर जाने को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
मलेरिया के पांच से सात मरीज हर दिन मिल रहे
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में मलेरिया के मरीज तीन सौ के पार पहुंच गए हैं। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन पांच से सात मलेरिया से पीड़ित मरीज मिल रहे हैं। इसी तरह एक या दो मरीज डेंगू संभावित भी मिल रहे हैं। भर्ती होने जैसी हालत न होने पर उन्हें दवा देकर इलाज किया जा रहा है।
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बाहरी लैब की रिपोर्ट पर भर्ती की सुविधा
डेंगू संभावित होने पर बाहर की लैब से जांच के बाद मरीज को राजकीय मेडिकल कॉलेज के डेंगू वार्ड में भर्ती करने की सुविधा है। प्लेट्लेटस कम होने, शरीर में चक्कते या मसूड़ा अथवा शरीर के किसी अंग से खून आने पर डेंगू पीड़ित मानकर उनका उपचार किया जाता है। उसके बाद अस्पताल की लैब से जांच कराई जाती है।
फैक्ट फाइल
600 मरीजों को हर दिन राजकीय मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन के पास पहुंच रहे।
150 मरीज वायरल बुखार से पीड़ित आ रहे हैं।
115 खून की जांच प्रतिदिन अस्पताल की लैब में होती हैं।
ये है डेंगू के लक्षण
तेज बुखार आना
शरीर में तेज दर्द
सिर में दर्द
मसूड़ों, शौच के दौरान खून आना
शरीर में लाल चक्कते पड़ना
सीएचसी पर डेंगू वार्ड का दावा, कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से जंग के लिए सीएचसी पर पांच बेड आरक्षित कर रखे हैं। हालांकि ग्रामीण अंचल में बने सीएचसी में जहां बुखार और खांसी की दवा लेने को मरीज तैयार नहीं होते हैं वहां डेंगू संभावित मरीज भर्ती होकर जोखिम लेने को तैयार नहीं है। इसलिए अधिकतर ग्रामीण राजकीय मेडिकल कॉलेज का रुख करने को मजबूर हैं।
अस्पताल में 12 बेड डालकर डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल में डेंगू की जांच का इंतजाम भी है। मरीजों का उपचार किया जा रहा है। - डॉ. एयूपी सिन्हा, सीएमएस
जनवरी से अभी तक मलेरिया के 365 व 17 मरीज डेंगू के सामने आ चुके हैं। डेंगू से बचाव के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा। सीएचसी पर भी डेंगू से निपटने के इंतजाम हैं। - डॉ. सूर्यप्रकाश, जिला मलेरिया अधिकारी
बदलते मौसम में बच्चों को चपेट में ले रहा बुखार
सुबह और शाम में सर्दी और दिन में गर्मी ने सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर डाला है। बदलते मौसम में बच्चे बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम चपेट में आने लगे हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले करीब दो सौ बच्चों में अधिकतर को बुखार, खांसी, जुकाम की शिकायत है। अधिकतर बच्चों को दवा देने के बाद उन्हें घर विदा किया जा रहा। इसके अलावा खून की कमी, दिमागी बुखार और निमोनिया से पीड़ित बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार हो रहा।
बच्चों को गर्म पानी, दूध व चाय पिलाएं। नौनिहालों को छूते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। बच्चों के बीमार होने पर तुरंत ही चिकित्सक की सलाह से दवा दें। - डॉ. रितुराज शास्त्री, बाल रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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