राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर एसएस कॉलेज में ‘इक्कीसवीं सदी में गांधी की प्रासंगिकता’ विषयक संगोष्ठी हुई। इस अवसर पर जीएफ कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. इफजाल-उर-रहमान खान ने कहा कि गांधी की प्रासंगिकता आज सर्वाधिक है। उनके बिना परंपराओं में उच्च मूल्यों की कल्पना नहीं की जा सकती।
डॉ. खान ने कहा कि गांधी ने कभी किसी धर्म का समर्थन नहीं किया, बल्कि उन्होंने कर्म आधारित धर्म की बात की, जिसमें आज प्रचलित मजहवी संकीर्णता का कोई स्थान नहीं है। प्राचार्य डॉ. अवनीश कुमार मिश्र ने कहा कि गांधी व्यक्ति नहीं, अपितु एक दर्शन है, उनके विचार समग्र मानव जाति के लिए धरोहर हैं। मिश्र ने कहा कि यदि भारत को विश्व गुरु बनना है तो उसे गांधी दर्शन के मार्ग पर चलना होगा। कला संकाय अध्यक्ष डॉ. रंजना प्रियदर्शिनी ने कहा कि गांधी के सत्य-अहिंसा सिद्धांत पूरी दुनिया में सार्वभौमिक शक्ति के रूप में स्वीकार किए जाते हैं। संकाय प्रभारी डॉ. आलोक मिश्र ने कहा कि गांधी की विचार धारा भारत के कण-कण में विद्यमान है। गांधी की हत्या करके उनके विचारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
संगोष्ठी में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. आदित्य कुमार सिंह, डॉ. आफताब अख्तर, संतोष पांडेय, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री, डॉ. शालीन कुमार सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए। डॉ. विकास खुराना के संयोजन में हुई संगोष्ठी में डॉ. पूनम, डॉ. अर्चना गर्ग, डॉ. अनुपम शर्मा, डॉ. एसपी डबराल, डॉ. मधुकर श्याम शुक्ल आदि मौजूद रहे।