आर्य समाज के सत्संग समारोह के अंतिम दिन आचार्य संजीव आर्य ने कहा कि जब तक संसार वैदिक शिक्षाओं को अपने आचरण में नहीं उतार लेता, तब तक ईर्ष्या, द्वेष, अशांति, क्षोभ, अहंकार का विनाश नहीं पाएगा। अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए आचार्य संजीव आर्य ने कहा कि वेद का संदेश है कि मनुष्य बनो। वेद आर्य बनने की बात करता है। आर्य का अर्थ श्रेष्ठ होता है और श्रेष्ठ मनुष्य ही समाज से बुराइयां मिटा सकता है। आचार्य विजय देव नैष्ठिक ने कहा कि हमें निरंतर श्रद्धापूर्वक यम-नियम का पालन करते हुए ईश्वर की उपासना करनी चाहिए। ईश्वर उपासना से मानव की बुरी वृत्तियां भस्म हो जाती हैं, और श्रेष्ठ वृत्तियां पैदा होने लगती हैं। इस अवसर पर सत्यवीर आर्य, रवींद्र नाथ आर्य आदि ने भी वेदों का संदेश दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य प्रेम बिहारी गुप्ता, रामंचद्र गुप्ता, कृष्ण कुमार सक्सेना को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इससे पूर्व यज्ञ का आयोजन किया गया। मंत्री भुवनेश कुमार आर्य ने आभार व्यक्त किया। आयोजन में बलवीर शास्त्री, प्रियंबदा, सुषमा, जीतराम वर्मा, जितेंद्र नाथ आर्य, वेदपाल सिंह, माधुरी आदि का योगदान रहा।