हिंदू धर्म में वट अमावस्या (वर अमावस) का बहुत महत्व है, इस दिन सुहागिनें पति की लंबी उम्र की कामना के लिए उपवास रखती हैं और बरगद अर्थात वट वृक्ष की पूजा करती हैं।
इसी कामना को लेकर रविवार को सुहागिनों ने उपवास रखा और लाल जोड़े में सजधज कर बरगद की विधि-विधान से पूजा की। चूंकि वट वृक्ष की उम्र सबसे अधिक होती है, इसीलिए आज के दिन इसी वृक्ष को पूजा जाता है। सुहागिनों ने परंपरागत ढंग से मिष्ठान, पूड़ी आदि से भोग लगाकर आरती की और बाद में सूत का कलावा वृक्ष पर लपेटकर पति के दीर्घायु होने की कामना की। बाद में बरगद के फल को गटक कर ही उपवास खोला। शहर में मारवाड़ी पाठशाला, चौकसी नाथ मंदिर, बाबा बनखंडीनाथ मंदिर समेत उन स्थलों पर सुहागिनों का सुबह से ही तांता लगा रहा, जहां बरगद के पेड़ थे। इसके अलावा विषम परिस्थितियों में बरगद की टहनी घर पर मंगाकर सुहागिनों ने घर में श्रद्धापूर्वक वट अमावस्या की पूजा की।
अजय