भावलखेड़ा। ताहवरगंज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन रविवार को कथा व्यास पंडित मोहित शास्त्री ने कंस-वध के प्रसंग का वर्णन कर श्रद्धालुओं को रोमांचित कर दिया। इसके साथ ही पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा।
कथा व्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का सशक्त संदेश दिया। कथा व्यास ने कहा कि आकाशवाणी सुनने के बाद से कंस काफी भयभीत था और उसे अपने लोगाें पर भी भरोसा नहीं रहा। इसीलिए उसने महल में अपनी सुरक्षा के लिए जरासंध के सैनिक तैनात किए थे। क्रोधित कंस अपनी तलवार निकालकर भगवान श्रीकृष्ण की ओर बढ़ा। कृष्ण के चाचा अक्रूर ने उसे रोकने का प्रयास किया। कंस ने अक्रूर को पटका तो भगवान श्रीकृष्ण ने कंस को घसीटकर उसकी तलवार से ही उसका अंत कर दिया। कथा श्रवण में आयोजक अजय मिश्रा, संजय मिश्रा, अनिल मिश्र, प्रियांशु मिश्रा, हिमांशु आदि श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद
श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सुनाया रुक्मिणी विवाह का प्रसंग
परौर। बर्खे मई गांव में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को कथावाचक परमानंद शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्हाेंने कहा कि रुक्मिणी ने मन में भगवान श्रीकृष्ण को पति मान लिया, लेकिन रुक्मिणी का भाई बहन का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था।
रुक्मिणी ने अपने कुलगुरु के माध्यम से श्रीकृष्ण को पत्र भिजवाया कि यदि वह उन्हें लेने नहीं आए तो शिशुपाल जबरदस्ती उनके साथ विवाह कर लेगा और वह जीते-जी शिशुपाल को अपना पति स्वीकार नहीं करेंगी। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका से आकर कुंडलपुर के देवी मंदिर में रुक्मिणी से विवाह किया। कथा श्रवण में नाथू लाल यादव,अरविंद कुमार सिंह, विनीत कश्यप ,राजपाल सिंह, कमलेश कुमार,नन्हे सिंह आदि श्रद्धालु शामिल रहे। संवाद