शाहजहांपुर। वर्ष 2025 में लड़खड़ाने के बाद 2026 में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव की उम्मीद है। राजकीय मेडिकल कॉलेज और सीएचसी-पीएचसी में व्यवस्थाओं को पंख लग सकते हैं। अधूरे पड़े निर्माण कार्याें के पूरा होने से मरीजों को बेहतर चिकित्सीय सेवाएं मिलेंगी। मच्छरों और संक्रमण जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ने पर मरीजों को बेड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
जिले में 16 सीएचसी और 39 पीएचसी का संचालन होता है। यहां सिर्फ सामान्य बीमारियों का उपचार होता है। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे सीएचसी-पीएचसी से मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में भी व्यवस्थाएं बेहतर नहीं हाेने के कारण बरेली या लखनऊ भेजा जाता है। इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग को नए डॉक्टर मिल सकते हैं, साथ ही मेडिकल कॉलेज में चिकित्सीय सुविधाएं सुधर सकती हैं।
ये काम होंगे पूरे
ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट से मिलेगी राहत
स्वास्थ्य विभाग जिले में ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट का निर्माण करा रहा है। इसके तहत आपदा के समय में मरीजों को रेफर करने के बजाय सीएचसी स्तर पर ही उपचार मिल सकेगा। 13 जगह पर निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि तिलहर में जगह नहीं मिलने पर सीएमओ ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भवन ध्वस्त कराकर जगह का प्रस्ताव दिया है।
20 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से मिलेगा राहत
ग्रामीण क्षेत्र में अगले वर्ष 20 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिर खुल जाएंगे। 15 भवन मिल गए हैं, शेष के लिए भवन की तलाश की जा रही है।
सोलर पैनल से रोशन होंगी सीएचसी
शहर की करीब 15 सीएचसी पर 20 केवीए की सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट होने पर स्टाफ को जूझना नहीं पड़ेगा।
क्रिटिकल केयर यूनिट, न्यू इमरजेंसी की मिलेगी सौगात
नए वर्ष पर राजकीय मेडिकल कॉलेज में कई सौगात मिलेंगी। अजीजगंज स्थित अस्पताल में 16 करोड़ रुपये की क्रिटिकल केयर यूनिट अगले वर्ष बनकर तैयार हो सकती है। इसी तरह न्यू इमरजेंसी का निर्माण कार्य भी पूरा हो जाएगा। अस्पताल में सौ बेड के अस्पताल को बजट आवंटित होने की उम्मीद है।
ये आईं चुनौतियां
- पिछले दो सालों से बाढ़ की समस्या बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। निचले इलाके में बने राजकीय मेडिकल कॉलेज के अंदर तक पानी भरने से स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं थीं। गत वर्ष काफी नुकसान होने के कारण इस बार सजगता की वजह से नुकसान से बचा गया है।
- डेंगू, मलेरिया के प्रकोप के दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज में बेड तक मिलना मुश्किल हुए। अतिरिक्त बेड डाले गए।
-विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पाईं। इस कारण मरीजों को रेफर किया गया।
ये हैं उम्मीदें
-राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की सुविधा
-कैंसर रोग विशेषज्ञ की तैनाती के बाद रेडियोथेरेपी यूनिट की सुविधा
-मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट के शुरू होने की संभावना
-जिगनेरा में 500 बेड के अस्पताल के लिए प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद
-होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के लिए बजट का आवंटन
-सीएचसी-पीएचसी पर स्टाफ में इजाफा।
पुराने अस्पताल के सिटी अस्पताल के रूप में शुरू होने की उम्मीद
शहर में स्थित पुराने अस्पताल को सिटी अस्पताल के रूप में शुरू कराने के लिए प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। तत्कालीन सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने परिसर में बने वर्षों पुराने क्वार्टर तोड़कर जमीन उपलब्ध होने का प्रस्ताव दिया था। इसे लेकर सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन ने भी मांग उठाई थी। फिर डीएम ने निरीक्षण किया था, लेकिन मामला फाइलाें में अटक गया।
ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट व आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सुविधा नए साल में मिल जाएगी। सीमित संसाधन होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
- डॉ. विवेक मिश्रा, सीएमओ
राजकीय मेडिकल कॉलेज में कई प्रोजेक्ट गतिमान हैं, जो नए साल में पूरे हाेंगे। इससे मरीजों को लाभ मिलेगा। सौ बेड के अस्पताल के लिए भी पत्राचार किया जा गया है।
- डॉ.एमपी गंगवार, चिकित्सा अधीक्षक-राजकीय मेडिकल कॉलेज
पुराना जिला अस्पताल स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कायार्लय। संवाद
पुराना जिला अस्पताल स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कायार्लय। संवाद
पुराना जिला अस्पताल स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कायार्लय। संवाद