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हजार रुपये दो, जांच करा लो

Fri, 26 Jun 2015 08:24 PM IST
शाहजहांपुर।
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 अगर आपको शक है कि दूधिया दूध में पानी के साथ अन्य हानिकारक रसायन की मिलावट कर रहा है या फिर किराना दुकानदार बेसन में मटर का आटा मिला रहा है तो आप इसकी खुद भी जांच करा सकते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने व्यवस्था की है, ऐसी चीजों के सैंपल की जांच कोई भी एक हजार रुपये शुल्क देकर करा सकता है। मिलावट साबित होने पर विक्रेता पर कार्रवाई के लिए विभाग को लिखित शिकायत देनी होगी।
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घरों में खान पान की चीजें नियमित तौर पर इस्तेमाल करने के दौरान अक्सर उनका स्वाद और रंग बदला नजर आता है। चूंकि, यह सारी चीजें एक निश्चित दुकानदार से ली जाती हैं, इसलिए जांच के झमेले में पड़ने के बजाय लोग संबंधित विक्रेताओं से मौखिक तौर पर शिकवा करके खामोश हो जाते हैं। जन सामान्य की इसी दिक्कत को समझते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने गत वर्ष 22 दिसंबर को जारी एक शासनादेश के आधार पर दूध और दुग्ध उत्पादों की सशुल्क जांच कराने की सुविधा लागू की थी। इसी सुविधा का विस्तार करके अब खान-पान की अन्य कई वस्तुओं की व्यक्तिगत तौर पर जांच कराने के दायरे में लाया गया है।

इन सारी चीजों के स्वयं लिए जा सकते हैं नमूने
- दूध एवं उससे निर्मित उत्पाद
- तेल एवं वनस्पति घी
- खाद्यान्न, दलहन और उनके उत्पाद
- मिठाइयां एवं कंफेक्शनरी उत्पाद
- मीठा करने वाले रासायनिक तत्व
- नमक, मसाले और अन्य उत्पाद
- चाय, कॉफी
- पान मसाला एवं संबंधित उत्पाद
- पके हुए भोज्य पदार्थ और प्रिजर्व उत्पाद

इन प्रयोगशालाओं को सीधे भेज सकते हैं नमूने
जांच कराने योग्य सैंपल संबंधित उपभोक्ता लखनऊ स्थित राज्य स्तरीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला सहित वाराणसी, मेरठ, आगरा, गोरखपुर और झांसी स्थित क्षेत्रीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला को सीधे भेज सकते है।
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ट्रेजरी चालान से जमा करना होगा शुल्क
खाद्य सैंपल की जांच कराने के लिए नियत एक हजार रुपये का शुल्क ट्रेजरी चालान के जरिए लेखा शीर्षक 0210-चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य-04-लोक स्वास्थ्य-104-फीस और अर्थदंड आदि के उपशीर्ष 04-खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत उत्पादों की जांच हेतु शुल्क मद में जमा किया जाएगा। जांच के लिए सैंपल विभाग के अभिहीत अधिकारी अथवा प्रयोगशाला प्रभारी को उपलब्ध कराते समय जमा हुए ट्रेजरी चालान की फोटो कॉपी भी देनी होगी।

कोर्ट में मान्य नहीं होगी व्यक्तिगत नमूनों की रिपोर्ट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त पीके सिंह के हस्ताक्षर से जारी उपरोक्त व्यवस्था के संबंध में विभागीय अपर आयुक्त प्रशासन राम अरज मौर्य ने प्रदेश के सभी अभिहीत अधिकारियों को भेजे सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत तौर पर जांच को भेजे गए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट की विधिक अधिमानता नहीं होगी।

मिलावट के प्रति उपभोक्ता होंगे जागरूक
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहीत अधिकारी टीआर रावत के अनुसार उपभोक्ता स्वयं लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर भले ही अदालत में संबंधित विक्रेता पर दावा नहीं कर सकें, लेकिन उनमें खाद्य वस्तुओं में मिलावट के प्रति जागरूकता अवश्य आएगी। इस व्यवस्था से विभाग का राजस्व बढ़ेगा और विक्रेताओं में शुद्ध चीजों की बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।
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